deltin33 Publish time 1 hour(s) ago

Darbhanga Maharaj : महाधिरानी कामसुंदरी के एकादशा कर्म में उमड़े खास और आम लोग, दिखी राजशाही परंपरा

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/Darbhanga-Maharaj-1769007247037.webp

भोजन करते श्रोत्रिय समाज के लोग । जागरण



जागरण संवाददाता, दरभंगा। महाधिरानी कामसुंदरी के एकादशा कर्म में बुधवार को बड़ी संख्या में खास व आम लोगों ने भाग लिया। शुरू में मधुबनी के लक्ष्मीवती गुरुकुल सरसोपाही से आचार्य रुपेश कुमार झा के नेतृत्व में पहुंचे चार बटुकों ने वेद पाठ किया।

मौके पर पहुंचे वड़ताल धाम गुजरात के स्वामी धर्म प्रकाश दास (यूएसए), खरारी स्टेट के युवराज डा.शूलपाणि सिंह, मालकित सिंह, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता उज्जवल कुमार, संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा, राजनगर के विधायक सुजीत पासवान, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री जीवेश कुमार, पर्यटन व कला संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, विधान पार्षद घनश्याम ठाकुर आदि ने महाधिरानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। स्वामी धर्म प्रकाश दास ने वड़ताल धाम के प्रमुख नौतम स्वामी के शोक संदेश को पढ़कर सुनाया।

कहा कि पूज्य दादी मां का जीवन सादगी, संस्कार, करुणा एवं धर्म परायणता का जीवंत उदाहरण रहा। ऐसे पुण्यात्मा का निधन केवल परिवार ही नहीं, अपितु समूचे समाज के अपूरणीय क्षति है।

दादी मां का स्थान इस सृष्टि में सर्वोच्च होता है। वे न केवल परिवार की धुरी होती हैं, बल्कि संस्कारों की प्रथम गुरु भी होती है। पूज्य दादी मां द्वारा बोए गए संस्कार गए संस्कार, उनके आदर्श और स्मृतियां सदैव आप सभी को धर्म,धैर्य और कर्तव्य पथ पर प्रेरित करती रहेंगी, यहीं उनकी सच्ची अमरता है।
एकादशा कर्म में प्राप्त दान सामग्री पर जताई प्रसन्नता

महारानी के एकादशा कर्म में दान सामग्री प्राप्त कर जितवारपुर के महोदय झा ने प्रसन्नता जताई। पलंग, गद्दा समेत बिछावन की सभी सामग्री, गाय, छागर, चांदी का थाली, लोटा, बाल्टी, ग्लास, बर्तन और पीतल का पांच बर्तन प्राप्त हुआ है। इसके अलावा फ्रिज, वाशिंग मशीन, घड़ी, मिक्सचर मशीन, आयरन, ड्रेसिंग टेबल आदि श्राद्ध स्थली पर दान में मिले हैं।

इसी सामान का सेट आंगन में भी दान हुआ। श्राद्ध स्थली की सामग्री को महापात्र ने प्राप्त किया। जबकि आंगन की दान सामग्री धीयन पक्ष (बेटी पक्ष) के भगीना व कुटुंब के बीच बांटा गया। पंडित महोदय झा ने बताया कि कर्ता रत्नेश्वर सिंह, कुमार राजेश्वर सिंह एवं कुमार कपिलेश्वर सिंह ने राज परिवार की परंपरा को मौजूदा समय में भी जीवंत रखा है।
वस्त्र त्यागकर जमीन पर बैठ किया भोजन

एकादशा कर्म संपन्न होने के बाद भोज में लोगों की भागीदारी हुई। इसमें श्रोत्रिय ब्राह्मण के भोजन की पद्धति आम लोगों के कोतूहल का केंद्र रहा, जहां सभी लोगों ने जमीन पर बैठकर केवल धोती धारण कर एवं चादर ओढ़कर भोजन ग्रहण किया। इनको भोजन परोसने वाले लोग भी इसी रूप में दिखे।

भोजन से पहले वस्त्र त्याग देने की परंपरा के संबंध में राज परिवार के जानकार लालबाग के कृष्णानंद मिश्र उर्फ मन्नालाल जौहरी ने बताया कि वर्षों से श्वेत ब्राह्मण (श्रोत्रिय) इसका निर्वहन करते आ रहे हैं। भोजन के समय सभी व्यंजन को पत्तल या पात्र में रखा जाता है, जबकि नमक को मिट्टी पर ही रखते हैं। नमक के दुर्गुण को मिट्टी सोख लेती है।

भोजन करने में श्रम लगता है। पसीना भी आता है। भोज में खटरस भोजन परोसा जाता है। उसका गुण पसीना में भी आता है। शरीर स्वस्थ रहे, इसलिए वस्त्र खोलकर भोजन करने का विधान है।

14 वीं शताब्दी पर महाराज हरिसिंह देव के समय से शुरू हुई परंपरा का निर्वहन महाराज कामेश्वर सिंह एवं महारानी कामसुंदरी देवी ने बखूबी किया। अब युवराज कपिलेश्वर सिंह उस ध्वजा को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
Pages: [1]
View full version: Darbhanga Maharaj : महाधिरानी कामसुंदरी के एकादशा कर्म में उमड़े खास और आम लोग, दिखी राजशाही परंपरा

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com