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पांच साल में 16 प्रतिशत घटा दिल्ली का पीएम 10, लक्ष्य से छह प्रतिशत पीछे; NCAP की रिपोर्ट में हवा में सुधार का दावा

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प्रतीकात्मक तस्वीर।



संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान अति सूक्ष्म कण पीएम10 के स्तर में 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। हालांकि, यह कमी 22 प्रतिशत के तय लक्ष्य से छह प्रतिशत कम है। यह आंकड़ा 2017-18 के आधार वर्ष के संदर्भ में आंका गया था, जिसके अनुसार दिल्ली में पीएम 10 की वार्षिक औसत सांद्रता 2017-18 में 241 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 203 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई।
औद्योगिक स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को करेंगे कम

दिल्ली उन 130 शहरों में से एक है जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं। यह एक दीर्घकालिक रणनीति है जिसका उद्देश्य वाहनों, सड़क की धूल, निर्माण कार्य, कचरा जलाने और औद्योगिक स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को कम करके वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। एनसीएपी के तहत शहरों को या तो पीएम 10 के स्तर में 40 प्रतिशत तक की कमी हासिल करनी होगी या 2025-26 तक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक को पूरा करना होगा।
40 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की

अपने आकलन में, केंद्र सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 103 शहरों में वायु गुणवत्ता में 2017-18 के आधार स्तर की तुलना में सुधार हुआ, जबकि 27 शहरों में कोई कमी दर्ज नहीं की गई। अब तक 22 शहरों ने राष्ट्रीय पीएम 10 मानकों को पूरा कर लिया है, और 25 शहरों ने 40 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की है।

केंद्र सरकार के मुताबिक उक्त कार्यक्रम के तहत प्रदूषण नियंत्रण उपायों की दिशा में अब तक 13,784.68 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, एनसीएपी को 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
इन कारणों से बढ़ता है पीएम 10 का स्तर

पीएम 10 (10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण) कई स्रोतों से बढ़ता है। इनमें मुख्य रूप से निर्माण और विध्वंस कार्य (धूल), सड़क और कृषि से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, जीवाश्म ईंधन का दहन, कचरे और झाड़ियों की आग और धूल भरी आंधियां शामिल हैं, जो हवा में मिलकर प्रदूषण बढ़ाते हैं।
इन प्रयासों से कम हुआ पीएम 10 का स्तर

दिल्ली में पीएम 10 कम करने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। इनमें वाहनों पर सख्त नियम (बीएस छह, इलेक्ट्रिक), निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण (70 लाख पेड़), एंटी-स्माग गन, सड़क पक्की करना व प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कार्रवाई शामिल हैं।
भविष्य में इसे और कम करने की योजना

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने वर्ष 2021 में अपनी स्थापना के बाद से ही निर्देशों/सलाहों और आदेशों की एक श्रृंखला के माध्यम से, दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई नीतिगत उपायों व जमीनी कार्रवाई की शुरुआत की है। दिल्ली सरकार का भी दावा है कि जमीनी स्तर पर निरंतर प्रयासों और अल्प/मध्यम/ दीर्घकालिक में ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए लक्षित नीतिगत पहलों के साथ, वायु गुणवत्ता परिदृश्य में साल दर साल धीरे- धीरे लेकिन उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

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