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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav, चार दिन से पक्ष में बना रहे माहौल

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव --स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद



डिजिटल डेस्क, जागरण, लखनऊ : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव खुलकर संत और महात्माओं के पक्ष में खड़े हो गए हैं। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ के साथ ही माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोकने पर सपा के मुखिया ने योगी आदित्यनाथ सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

अखिलेश यादव ने संतों की योग्यता पर सवाल उठाने के साथ उनसे हो रहे भेदभाव की निंदा की है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट से सरकार को संतों से क्षमा भी मांगने की सलाह दी है। अखिलेश ने पोस्ट किया “ किसी और की गलती के लिए भी यदि आप अप्रत्यक्ष रूप से कहीं दूर से भी जुड़े हुए हों तो भी क्षमा याचना करने से कोई छोटा नहीं हो जाता, बल्कि मन को हल्का और अच्छा लगता है।

महान लोगों को पता होता है कि उस धृष्टता के पीछे किसी और का कोई व्यक्तिगत कारण अथवा स्वार्थ रहा होगा, इसीलिए वो बड़े मन से क्षमा याचक को माफ़ भी कर देते हैं और अपना स्नेह-आशीर्वाद भी देते हैं। इसीलिए हमारी संस्कृति में कहा गया है : क्षमा वीरस्य भूषणम्।

एक दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा कि भाजपा के महाभ्रष्ट राज में मेले के नाम पर पचासों हजार की महा-रकम कमीशन के रूप में गटक जाने का नया खेल शुरू हुआ है। इसीलिए उन साधु-संतों को भी सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जो मेले की शोभा होते हैं।

जिनका दर्शन मात्र ही आशीर्वाद होता है, उनके साथ बेहद आपत्तिजनक-अपमानजनक हिंसक दुर्व्यवहार शासन-प्रशासन इसलिए कर रहा है क्योंकि ‘मेला महाभ्रष्टाचार’ की कमीशनखोरी के इस गोरखधंधे में भाजपाई गुट की मिलीभगत है। इसीलिए जो भी मेले की दुर्व्यवस्था और बदइंतज़ामी के बारे में बोलेगा वो भाजपाई और उनके संगी-साथियों के साथ-साथ ‘संगीधिकारियों’ के निशाने पर होगा और सरेआम शिकार होगा। मेला क्षेत्र के संजय का ‘धृतराष्ट्र’ कौन है, जिसको आँखों देखा हाल सुनाया-दिखाया जा रहा था। भाजपा को कमिश्नर की जगह ‘कमीशनर’ की नयी पोस्ट बना देनी चाहिए। कुछ तो है जिसमें हिस्सेदारी है।

माघमेला क्षेत्र में पिछले साल की तरह ही इस साल फिर से साधु-संतों-भक्तों के साथ हुआ दुर्व्यवहार अक्षम्य है। सदियों से चली आ रही शाही-स्नान की अखंड सनातनी परंपरा में गत वर्ष भी इसी सरकार द्वारा विघ्न डाला गया था। प्रश्न ये है कि ऐसी घटनाएं भाजपा की सरकार में ही क्यों हो रही हैं। मौनी अमावस्या का शाही-स्नान क्या पहली बार हो रहा है। इस अवस्था के लिए भाजपा का कुशासन और नाकाम व्यवस्था ही दोषी है।
मुख्य को हर जगह ‘मुख्य’ बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अहंकारी भाजपाई शासन और प्रशासन अपने से बड़ा किसी को नहीं मानता है। अब क्या इसका दोष भी ‘एआई’ पर मढ़ेंगे?
यदि उत्तर प्रदेश के गृह सचिव मनमानी कर रहे हैं तो भी गलत है और अगर किसी के निर्देश पर कर रहे हैं तो और भी गलत है।
जाँच हो!
घोर निंदनीय!
सर्टिफिकेट मांगना सनातन का सबसे बड़ा अपमान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज माघ मेला में संगम स्नान करने से रोकने पर बढ़े विवाद के बीच माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच नोटिस और जवाब मांगने की प्रक्रिया में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सर्टिफिकेट मांगना सनातन का सबसे बड़ा अपमान है। अखिलेश यादव ने कहा कि अगर एक अधिकारी संत से पूछेगा आपकी योग्यता क्या है तो इससे बड़ा हमारे सनातन धर्म का अपमान कोई नहीं हो सकता है। उन्होंने इसे सनातन धर्म, साधु-संत, संस्कृति, माघ मेले, हिंदुस्तान का सबसे बड़ा अपमान बताया है।
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