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शादीशुदा जोड़े फिर से बन गए दूल्हा-दुल्हन? सामूहिक विवाह योजना में बड़े खेल का पर्दाफाश, रुका करोड़ों का भुगतान

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प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना एक बार फिर मुरादाबाद में सवालों के घेरे में है। जिस योजना को गरीब बेटियों के सम्मान और पारदर्शी सहायता का प्रतीक बताया जाता है, उसी पर अब फर्जीवाड़े, अपात्रों को लाभ और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। दो दिन में कराए गए सामूहिक विवाह कार्यक्रमों को लेकर शिकायतें सीधे जिलाधिकारी तक पहुंचीं, जिनमें आरोप है कि कई मंडपों में असली जोड़े नहीं, बल्कि पहले से शादीशुदा और दलालों द्वारा लाए गए लोग बैठाए गए।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुज सिंह ने पूरे प्रकरण की औपचारिक जांच बैठा दी है। जिला विकास अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया गया है और फिलहाल सभी भुगतान रोक दिए गए हैं। कार्रवाई का संकेत संभावित घोटाले की ओर इशारा कर रहा है।

जिले में वर्ष 2025 के दौरान कराए गए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दो बड़े आयोजनों ने समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शिकायतों में आरोप है कि जल्दबाजी में कार्यक्रम कराकर सत्यापन की प्रक्रिया को औपचारिकता तक सीमित कर दिया गया। फर्जी जोड़े, पहले से शादीशुदा लोगों को मंडप में बैठाने और अपात्र लाभार्थियों को शामिल करने के आरोप है।

जांच की जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी गोविंद वल्लभ पाठक को सौंपी गई है। आदेश के अनुसार अब उन दोनों दिनों में कराई गई सभी शादियों की सूची, लाभार्थियों के दस्तावेज, आधार व पारिवारिक सत्यापन, भुगतान प्रक्रिया और स्थानीय स्तर पर तैनात अधिकारियों की भूमिका की परत-दर-परत जांच होगी।

जांच चयन प्रक्रिया से लेकर मंडप तक पहुंचने वाले जोड़ों की वास्तविक स्थिति भी खंगाली जाएगी। लोकतंत्र बचाओ मोर्चा ने जिलाधिकारी व सीडीओ को ज्ञापन देकर सीधे तौर पर घोटाले का आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि दलालों के जरिए ऐसे जोड़ों को मंडप में बैठाया गया जिनकी पहले ही शादियां हो चुकी थीं।

आरोप यह भी है कि कई मंडपों में उस दिन वास्तव में विवाह ही नहीं हुआ, सिर्फ सरकारी धन निकलवाने के लिए भीड़ जुटाई गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार असली जरूरतमंद जोड़ों की संख्या बेहद कम थी, जबकि कागजों में सैकड़ों शादियां दिखा दी गईं। मामला यहीं नहीं रुका।

कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामवीर सिंह ने भी दिसंबर 2025 में बुद्धि विहार और रामपुर रोड जीरो प्वाइंट पर हुए आयोजनों पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता पर अंगुली उठाई है। आंकड़े खुद कई सवाल खड़े कर रहे हैं। पहले चरण में 567 बेटियों की शादी के लिए धनराशि जारी हो चुकी थी।

इसके बाद 1069 लाभार्थियों के लिए शासन से और धन मांगा गया। शासन ने 10 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि समाज कल्याण विभाग को भेज दी, लेकिन जांच शुरू होने के चलते अभी तक यह राशि किसी बेटी के खाते में नहीं पहुंची है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुड़ी जैन का कहना है कि दोनों आयोजनों में कुल 2015 शादियां कराई गई थीं, जिनमें से 1636 पोर्टल पर दर्ज हैं। उनके अनुसार जिन लाभार्थियों की धनराशि पहले प्राप्त हो गई थी, उनके खातों में भेजी जा चुकी है, जबकि बाकी के लिए धनराशि आने के बावजूद भुगतान रोक दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
जांच करने वालों पर भी कसेगा शिकंजा

जांच का दायरा सिर्फ लाभार्थियों तक सीमित नहीं है। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी, ब्लाक स्तर के अधिकारी, कार्यक्रम आयोजन से जुड़े एजेंसियां और स्थानीय सत्यापन समितियां भी रडार पर हैं। माना जा रहा है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो न सिर्फ विभागीय कार्रवाई, बल्कि एफआइआर तक की नौबत आ सकती है।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब बेटियों के लिए उम्मीद का नाम है, लेकिन मुरादाबाद में उठे सवालों ने इस योजना की साख पर सीधा हमला है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच सिर्फ खानापूरी बनती है या सच में उन चेहरों को बेनकाब करेगी, जिन्होंने बेटियों के नाम पर सरकारी धन को खेल बना दिया।




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