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सामान्य प्रकृति के आरोपों के साथ जनहित याचिका नहीं दाखिल करनी चाहिए: हाई कोर्ट

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सामान्य प्रकृति के आरोपों के साथ जनहित याचिका (पीआइएल) नहीं दायर करनी चाहिए।

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने गौतम बुद्ध नगर जिले की डीके फाउंडेशन आफ फ्रीडम एंड जस्टिस के लिए उसके निदेशक कैफ मोहम्मद खान की ओर से दायर जनहित याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।

कोर्ट ने पाया कि याचिका में बहुत ही सामान्य तरीके से 37 गांवों में किसी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन किसी भी विशिष्ट व्यक्ति या अवैध निर्माण का उल्लेख नहीं था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के सामान्य आरोपों के साथ जनहित याचिका दायर करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने कहा, ‘कोई ठोस साक्ष्य या विशिष्ट उदाहरण नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।’ याची की तरफ से यमुना और हिंडन नदियों के किनारे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

यह भी आग्रह किया गया था कि अवैध निर्माण की पहचान कर इसे जल्द से जल्द ध्वस्त किया जाए। हालांकि इसका उल्लेख नहीं किया गया कि कहां-कहां अवैध निर्माण हैं।
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