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बुद्ध के ज्ञान पथ पर चली शांति यात्रा, प्रागबोधी से महाबोधि मंदिर तक गूंजे करुणा के मंत्र

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प्रागबोधि से महाबोधि महाविहार तक ज्ञान यात्रा में शामिल बौद्ध भिक्षु



संवाद सूत्र,बोधगया(गयाजी)।बोधगया के ऐतिहासिक कालचक्र मैदान में 22 से 24 जनवरी तक आयोजित होने वाले बौद्ध महोत्सव से एक दिन पूर्व बुधवार को भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली में आस्था, शांति और करुणा का अनुपम संगम देखने को मिला। इस अवसर पर ‘ज्ञान यात्रा’ का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

ज्ञान यात्रा को बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी, प्रशिक्षु आईएएस सूरज कुमार और महाबोधि मंदिर के भिक्षु डॉ. मनोज ने पंचशील ध्वज दिखाकर रवाना किया। अहले सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रागबोधी (डुंगेश्वरी) पहाड़ की तलहटी पर एकत्र होने लगे थे।

यह यात्रा प्रागबोधी से शुरू होकर सुजाता स्तूप बकरौर होते हुए विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर तक पहुंची। करीब 10 किलोमीटर लंबी इस ऐतिहासिक यात्रा में सैकड़ों बौद्ध लामा, विदेशी श्रद्धालु, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल हुए। पूरे मार्ग में “बुद्धं शरणं गच्छामि” के मंत्रोच्चार से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

मान्यता है कि इसी पावन मार्ग से राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने कठिन तपस्या के बाद मध्यम मार्ग को अपनाया और अंततः बोधगया पहुंचकर ज्ञान प्राप्त किया। इसी ऐतिहासिक पथ को पुनः जीवंत करने के उद्देश्य से यह ज्ञान यात्रा निकाली गई, ताकि लोग बुद्ध के बताए करुणा, अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ले सकें।

महाबोधि मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की।

इस अवसर पर बोधगया प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार गुप्ता और बोधगया थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।

बौद्ध महोत्सव से पूर्व निकली यह ज्ञान यात्रा न केवल अतीत की स्मृतियों को जोड़ने का माध्यम बनी, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश भी देती नजर आई।
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