यूपी में 20 मिनट में तय हुआ गुनहगारों का अंजाम, गैंगरेप केस में 8 दिन में आया ऐतिहासिक फैसला
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/family-court-1768930779154.webpजागरण संवाददाता, चंदौसी। एक बार फिर जिला न्यायालय ने मात्र आठ दिन में ही सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोष सिद्ध कर साबित कर दिया कि गलत काम करने वालों को बख्शा नहीं है।
इतना ही नहीं विशेष लोक अभियोजक पाक्सो आदित्य सिंह का दावा है कि यह सजा प्रदेश में पहली है। जो, बीएनएस कानून के तहत सबसे कम समय में दी गई है।
प्रकरण की विवेचना करने वाले उपनिरीक्षण संतोष कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में 16 अक्टूबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई थी। फिर 89 दिन तक जांच जारी रही। विवेचक ने बताया कि आरोपितों के मोबाइल बंद थे, ऐसे में दोनों को ट्रेस करने में दिक्कत हो रही थी।
दोनों ही बात करने के लिए व्हाट्स एप का इस्तेमाल कर रहे थे। 20 नवंबर को आरोपितों भी गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद आगे की जांच की और 12 जनवरी को न्यायालय में लगभग 50 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई।
इस प्रकरण में छह पब्लिक के गवाह सहित दस लोगों की गवाही हुई है और मंगलवार को करीब 20 मिनट में ही प्रकरण में सजा सुनाकर इतिहास रचा गया है। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि बीएनएस की धाराओं में दुष्कर्म के मुकदमे में विशेष न्यायाधीश (पाॅक्सो एक्ट) /अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार ने गुरुवार को दूसरा फैसला सुनाया है।
इससे पहले 17 नवंबर को बहजोई थाना क्षेत्र में हुए किशोरी से दुष्कर्म के मामले में उन्होंने चार्जशीट दाखिल होने के सात दिन के अंदर फैसला सुनाया था। ज्ञात हो कि बहजोई थाना क्षेत्र के एक गांव का सोनू को किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में दस साल की सजा और 23 हजार के जुर्माने से दंडित किया था। इतना ही नहीं यह सजा प्रदेश में पहली भी है। जो, बीएनएस कानून के तहत सबसे कम समय में दी गई है।
अब मिला न्याय, खेती-किसानी करते हैं पीड़ित के स्वजन
चंदौसी : बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद आरोपितों काे सजा दिलवाने में संघर्ष करने वाले स्वजन खेती-किसानी करते हैं। मंगलवार को जब आरोपितों को सजा सुनाई गई तो वह भावुक हो गए और बोले कि अब बेटी को सही में न्याय मिला है।
अपराध करने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार मजबूती के साथ पैरवी कर रही है। विवेचना में मजबूत साक्ष्याें के साथ चार्जशीट दाखिल होती है। उसी का नतीजा है कि कम समय में सजा सुनाई जा रही हैं। - केके बिश्नोई, एसपी, संभल।
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