बांदा में बोले धीरेंद्र शास्त्री, जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया तो समझो....
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/Dhirendra-Shastri-(1)-1768921797895.webpजागरण संवाददाता, बांदा। शहर के मवई बाईपास में पांच दिवस तक हनुमंत कथा में बागेश्वर धाम मठ के पीठाधीश्वर पंडित आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के इर्द गिर्द रहे। उनके कई बयान चर्चा में रहे। उन्होंने कहा, जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया उस दिन कास्टवाद नहीं राष्ट्रवाद होगा।
उन्होंने सनातन धर्म, हिंदू एकता और राष्ट्रवाद को केंद्र में रखकर प्रभावी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि आज हिंदू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बची हुई पहचान है। हिंदू अपनी पहचान धर्म से नहीं, बल्कि जाति और उपनाम से बताने लगा है।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि हिंदी विचारधारा से जुड़े लोगों को छोड़ दें तो किसी भी हिंदू से पूछो, वह अपने आप को शर्मा, वर्मा, पंडित या किसी जाति विशेष से जोड़कर बताता है, लेकिन गर्व से यह नहीं कहता कि वह हिंदू है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहचान धर्म से है तो हिंदू कहलाने में संकोच क्यों।
उन्होंने तीखे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन न शर्मा बचेगा, न वर्मा, न क्षत्रिय, न रैदास वाले, न अगड़ा और न पिछड़ा। उस दिन केवल राष्ट्र बचेगा या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल होगा। इसलिए आज समय की मांग है कि कास्टवाद को छोड़कर राष्ट्रवाद को अपनाया जाए।
कथा पंडाल में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को उन्होंने सनातन चेतना का जागरण बताया। आचार्य शास्त्री ने कहा कि लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का कथा में पहुंचना इस बात का संकेत है कि अब हिंदू समाज जाग रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
समापन दिवस पर उनका संदेश स्पष्ट था सनातन धर्म की मजबूती, हिंदू एकता और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च निष्ठा ही भारत को सुरक्षित और सशक्त बना सकती है। कथा के दौरान पांच दिवस तक बार-बार गूंजे जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों ने वातावरण को राष्ट्र और धर्म के भाव से ओतप्रोत कर दिया।
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