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सरकारी राशन डकार रहे जैश के आतंकी? बंकरों से मैगी और बासमती चावल बरामद; 12 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाया था ठिकाना

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किश्तवाड़ में 12 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाया था ठिकाना (Jagran Photo)



नवीन नवाज, जम्मू। आतंकियों ने जम्मू संभाग के पहाड़ों व जंगलों में ठिकाने बना लिए हैं। ये ठिकाने छोटे बंकर की तरह हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों मे सैनिक इसी तरह के निगरानी मोर्चे बनाते हैं। किश्तवाड़ के सिंहपोरा के जंगल में रविवार को जैश आतंकियों के हमले के बाद सुरक्षाबल ने तलाशी अभियान के दौरान 12 हजार फीट की ऊंचाई पर ऐसा ही आतंकी ठिकाना बरामद किया।

घने जंगल के कारण इसे आसमां से ड्रोन से देखना भी मुमकिन नहीं है। ढलान पर घने जंगल में पत्थरों की आड़ में बने इस ठिकाने में करीब छह माह का राशन जमा किया गया था।
मैगी, आटा और बासमती चावल बरामद

इसमें मैगी से लेकर गैस सिलेंडर, बर्तन, आटा, बासमती चावल, घी और दवाएं तक शामिल थीं। स्पष्ट है कि आतंकी लंबे समय से यहां ठहरे थे और आगे भी रहने की तैयारी थी। यह भी स्पष्ट है कि स्थानीय आबादी से मदद उनके पास पहुंच रही थी। पूर्व में डोडा, ऊधमपुर व कठुआ के पहाड़ों में भी आतंकियों के कई ठिकाने मिले हैं।

आतंकी ठिकाने से बरामद राशन की बोरियों पर फूड कॉर्पोरेशन आफ इंडिया और पंजाब सरकार की मुहर थी। इससे पता चलता है कि सरकार की ओर से गरीबों के लिए जारी किए जाने वाला राशन आतंकियों तक पहुंचा था। पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में एक आतंकी ठिकाने से जम्मू-कश्मीर सरकार के अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाएं मिली थीं।

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मुठभेड़ में एक जवान बलिदान

रविवार को आतंकी सुरक्षाबल पर हमले के बाद यहां से खाना छोड़कर भागे और बर्तनों में पका हुआ भोजन रखा हुआ था। इन्कार नहीं किया जा सकता कि आसपास आतंकियों का और भी ठिकाना है। मुठभेड़ में घायल एक जवान बलिदान हुआ है। वर्ष 2026 में आतंकी हिंसा में पहली बार जवान को जान गंवानी पड़ी है।

सात अन्य जवान घायल हुए हैं। सुरक्षाबल ने आतंकियों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन त्राशी चला रखा है। सूत्रों ने बताया कि किश्तवाड़ से लेकर कठुआ तक सक्रिय आतंकियों में एक बात समान है। ये जंगल में ही रहते हैं और इन्होंने अपने ठिकानों को मिनी बंकर की शक्ल दी है। यह किसी ग्रामीण से संपर्क करते हैं, तो इन्हें पता रहता है कि कितने समय में सुरक्षाबल वहां पहुंच सकते हैं।

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