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विश्व पुस्तक मेले में सैन्य शौर्य का जलवा, भारतीय सेना के पवेलियन और AI तकनीक ने जीता दिल




विश्व पुस्तक मेले में इस बार किताबों के बीच देश की सैन्य ताकत भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मेला परिसर में प्रवेश करते ही सशस्त्र बलों की मौजूदगी, युद्धपोतों की डमी और अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान देखकर दर्शकों के चेहरे खिल जाते हैं। बच्चे हों या युवा, हर कोई इस दृश्य को कैमरे में कैद करने को उत्सुक दिखता है।

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मेले में लगभग 1000 वर्गफुट में फैला भारतीय सेना का विशेष पवेलियन जीवंत सैन्य यात्रा का अनुभव कराता है। यहां सेना के ऐतिहासिक दस्तावेज, युद्ध की कहानियां, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां और परिचर्चा दर्शकों में रोमांच भर देती है।





यहां आए पश्चिम विहार निवासी वन ने बताया कि मैंने कभी सेना में प्रयोग होने वाला ड्रोन नहीं देखा था, लेकिन मुझे बताया गया कि यहां प्रदर्शित ड्रोन ऑपरेशन सिंदूर में सर्विलांस के लिए प्रयोग किए जा चुके हैं। यहां पर जो उपकरण दिखाई दिए उनके साथ मैंने सेल्फी ली है। इसी तरह मेरठ से आए प्रवेश सिंह ने कहा कि यहां आकर पता चलता है कि सैनिकों का जीवन आसान नहीं है। मेरा शुरू से सेना में जाने का सपना था। यहां आकर मुझे गर्व हो रहा है।





नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के अनुसार, यह संस्करण भारतीय सशस्त्र बलों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को उजागर करने का प्रयास है। यह युवाओं को युद्धभूमि से आगे जाकर कर्तव्य, अनुशासन और शांति के मूल्यों से जोड़ता है। मेले में सेना, नौसेना और वायुसेना पर आधारित 500 से अधिक किताबों का विशाल संग्रह है, जिसमें सैन्य इतिहास, वीरों की जीवनियां, संस्मरण और रणनीतिक अध्ययन शामिल हैं। इसके अलावा 21 परमवीर चक्र विजेताओं को समर्पित विशेष खंड, 100 से अधिक रक्षा विषयक परिचर्चाएं और पुस्तक विमोचन इस मेले को शौर्य और ज्ञान का अद्भुत संगम बना रहे हैं।





थीम पवेलियन में आयोजित पैनल चर्चा में भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान समुद्री जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। ‘नियम-आधारित व्यवस्था के निर्माण में भारतीय नौसेना की भूमिका’ विषय पर हुई चर्चा में गोवा मुक्ति से लेकर आज की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों तक नौसेना के योगदान को रेखांकित किया गया। लेफ्टिनेंट जीतवितेश सहारण ने 1961 में गोवा मुक्ति में भारतीय नौसेना की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘ऑपरेशन चटनी’ को भारतीय इतिहास का सबसे साहसिक और प्रभावशाली नौसैनिक अभियान बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत का पहला नौसैनिक अभियान था, जो सुबह लगभग पांच बजे शुरू होकर दोपहर तक सफलतापूर्वक पूरा हो गया।





मेले में 1947-48 के जम्मू-कश्मीर सैन्य अभियान पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता मेजर जनरल जगतबीर सिंह ने की। इस चर्चा में आजादी के तुरंत बाद भारत के पहले युद्ध की पृष्ठभूमि, परिस्थितियों और सैन्य रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। लेफ्टिनेंट जनरल जी.एस. कटोच ने बताया कि तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने शुरुआत में स्वतंत्र रहने का विकल्प चुना था, लेकिन पाकिस्तान द्वारा ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’ शुरू किए जाने के बाद हालात तेजी से बदले। इसके परिणामस्वरूप भारत के साथ ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर हुए और श्रीनगर में भारतीय सैनिकों को हवाई मार्ग से भेजा गया।





यहां एआई-संचालित ऑडियोबुक बूथ पाठकों को खुद कथावाचक बनने का रोमांचक अवसर दे रहा है। ऑनलाइन बुकस्टोर बुक्सवैगन द्वारा लगाए गए इस खास बूथ पर हर उम्र के पाठक अपनी आवाज में कहानियों को सुनने का अनुभव कर रहे हैं। इस पहल के तहत पाठकों को केवल 30 सेकंड का वॉइस सैंपल रिकॉर्ड करना होता है। इसके बाद वे बुक्सवैगन के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध 100 से अधिक पुस्तकों में से किसी भी शीर्षक को चुन सकते हैं और अपनी ही आवाज में उस कहानी का ऑडियो संस्करण सुन सकते हैं। मोबी डिक, किम, रामायण और भगवद्गीता जैसी कृतियां विशेष रूप से लोगों को आकर्षित कर रही हैं।





भारत मंडपम हॉल नंबर पांच के प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर लेखक सचिन कुमार जैन की नई पुस्तक भारत में सामाजिक नागरिक पहल का ऐतिहासिक सफरनामा का विमोचन हुआ। जैन की पुस्तक नागरिक आंदोलनों के सफर को दर्शाती है, जो समाज को प्रेरित करती है। इसके अलावा नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की बेस्टसेलर पुस्तकें सपनों की उड़ान, आजाद बचपन की ओर, बदलाव के बोल, सभ्यता का संकट और समाधान पर गहन चर्चा हुई।
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