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हिमाचल में 15 साल बाद दिखा ऐसा सूखा, बारिश न होने से किसानों की फसल चौपट; नौ करोड़ का नुकसान

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एक तरफ बर्फबारी तो दूसरी तरफ सूखा (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, शिमला। ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने के कारण हिमाचल में सूखे जैसे हालात बने हैं। नवंबर से अब तक 10 बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ लेकिन हर बार कमजोर रहा। इससे लगभग तीन माह से पड़ रहे सूखे से राहत नहीं मिल पा रही है। प्रदेश में अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से अभी तक वर्षा नहीं हुई है। केवल ऊंची चोटियों पर हिमपात हुआ है।

बीते वर्षों के आधार पर देखा जाए तो दिसंबर और जनवरी में शिमला, कोटखाई, मनाली सहित अन्य स्थानों पर हिमपात में कमी देखने को मिली है। वर्षा व हिमपात न होने से कृषि और बागवानी पर असर पड़ने के साथ पनविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके प्रभाव पर्यटन कारोबार पर भी पड़ा है।
कई वर्षों बाद बने ऐसे हालात

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की स्थिति हिमाचल में कई वर्षों के बाद बनी है, जब सर्दियों में तीन माह तक व्यापक वर्षा या हिमपात न हुआ हो। वर्षा न होने से गेहूं, जौ, मटर और सरसों की फसल पर काफी असर पड़ा है। नमी की कमी के कारण फसलें पीली पड़ गई हैं।

30 प्रतिशत क्षेत्र में तो बुआई ही नहीं हो सकी है। कृषि को अभी तक नौ करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। सेब, नाशपाती, आड़ू और प्लम के चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो रहे हैं। सूखे के कारण प्राकृतिक जलस्रोत, नाले और छोटी नदियां सिकुड़ने लगी हैं। कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
शीतकालीन सूखा 15 वर्ष बाद

जलविद्युत परियोजनाओं में पानी की आवक कम होने से बिजली उत्पादन घटा है, जिससे आने वाले समय में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल में इस तरह का लंबा शीतकालीन सूखा 10 से 15 वर्ष बाद देखने को मिल रहा है।

जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
लाहुल स्पीति जिले के पर्यटन स्थल जंस्कार समदो में सोमवार को बर्फ देखने के लिए पहुंचे पर्यटक। पर्यटक यहां पर फोर बाय फोर वाहनों से पहुंचे।


तीन माह में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने के कारण ऐसे हालात बने हैं। ईरान और अफगानिस्तान से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहा है। 22 से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है जिसके कारण 23 और 24 को भारी हिमपात और वर्षा होगी जिससे सूखे से राहत मिलने की उम्मीद है। संदीप कुमार शर्मा, वरिष्ठ विज्ञानी, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला।

सूखी ठंड ने बढ़ाई दिक्कत, छह डिग्री तक गिरा न्यूनतम

तापमान प्रदेश में सूखी ठंड से न्यूनतम तापमान में गिरावट आ रही है। हालांकि दिन में तेज धूप निकल रही है। सुबह-शाम पड़ रही ठंड से लोग खांसी, बुखार और जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। यही नहीं छाती जाम जैसी दिक्कत भी आ रही है। प्रदेश में न्यूनतम तापमान में छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है।

लाहुल स्पीति के ताबो व सेऊबाग में 6.2, जबकि कल्पा व रिकांगपिओ में 4.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। धूप निकलने से अधिकतम तापमान में सबसे अधिक वृद्धि कुल्लू के भुंतर में 6.1, मंडी में 4.1, बजौरा में 5.8 डिग्री सेल्सियस की आई है। चौपाल में 3.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है।

मौसम विभाग ने 21 जनवरी तक कांगड़ा, मंडी, ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में शीतलहर की चेतावनी जारी की है। सोमवार को बरठीं, ऊना, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर में शीतलहर चली।
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