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हर 100 किलोमीटर पर ट्रामा सेंटर जरूरी, ताकि समय से बचे जान: परिवहन मंत्री

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। हाईवे व एक्सप्रेस-वे पर सड़क हादसों के बाद घायलों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए हर 100 किलोमीटर पर एक ट्रामा सेंटर स्थापित करने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही स्कूली शिक्षा में ट्रैफिक नियमों को पाठ्यक्रम में शामिल कर उसके लिए पांच अंक निर्धारित किए जाने चाहिए।

यह सुझाव परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह का है, जो लोक निर्माण विभाग के विश्वेश्वरैया सभागार में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता और दक्षता विकसित करने के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

परिवहन मंत्री ने टी-प्वाइंट पर ब्रेकर लगाने और छोटी सड़कों पर भी सुरक्षा उपाय मजबूत करने पर जोर दिया। ड्राइविंग लाइसेंस की आयु सीमा पर बात करते हुए कहा कि कई अभिभावक 16 साल के बच्चों को वाहन चलाने दे देते हैं। ऐसे में यह भी सोचना होगा कि उन्हें कम से कम बुनियादी प्रशिक्षण कैसे दिया जाए।

उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए जन-जागरूकता सबसे बड़ा और प्रभावी हथियार है। यदि लोग यातायात नियमों को अपनी रोजमर्रा की आदत बना लें, तो सड़क हादसों में मौतों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

उन्होंने साफ कहा कि सरकार का उद्देश्य जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है। नियमों के पालन के बिना कोई भी कानून सफल नहीं हो सकता। मंत्री ने बताया कि सरकार ने दोपहिया वाहन की बिक्री के समय डीलर प्वाइंट पर दो हेलमेट देना अनिवार्य किया है।

इसके साथ ही ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ का नियम भी लागू किया गया है, लेकिन जन-जागरूकता की कमी के कारण इसका पूरा लाभ अभी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय स्वयं हेलमेट पहनें और पीछे बैठने वाले को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें। चार पहिया वाहन चालकों से उन्होंने सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, ओवर स्पीडिंग से बचने और शराब पीकर वाहन न चलाने की अपील की।

साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की ढील न दी जाए और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से अनुपालन कराया जाए।

अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल ने कहा कि सड़क परिवहन सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला माध्यम है और राज्य सरकार सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम कर रही है। परिवहन निगम लंबी दूरी की बसों में दो ड्राइवर की व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सड़कें सिर्फ कारों के लिए नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी सुरक्षित होनी चाहिए। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग अजय चौहान ने कहा कि पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन, लोक निर्माण विभाग और मीडिया के संयुक्त प्रयास से ही सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने चार-ई माडल (एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर) के जरिये हादसों को कम करने की जरूरत बताई।

परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा ओवरलोड और ओवर स्पीड वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़े गीतों का प्रचार जिला प्रशासन के माध्यम से कराया जा रहा है और स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यशाला में परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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