111 करोड़ रुपये महंगी पड़ेगी बोरे मंगाने में की लापरवाही, 87 हजार गांठ के बजाय अब मंगा रहे 71 हजार
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/mandi-1768877045317.webpराज्य ब्यूरो, लखनऊ। धान खरीद प्रक्रिया में खाद्य एवं रसद विभाग की लापरवाही से मुश्किल बनी हुई है। जूट बोरों की आपूर्ति के लिए समय से इंडेंट न भेजे जाने के कारण कीमतें बढ़ गई हैं और विभाग को 111 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आवश्यकता पड़ रही है।
सीमित धनराशि के कारण मजबूरी में विभाग ने केवल 71,787 गांठ जूट बोरों का ही इंडेंट जारी किया गया है, जबकि 87 हजार की खरीद की जानी थी। इससे धान खरीद और कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
धान खरीद प्रक्रिया के तहत चावल मिलों द्वारा सीएमआर की आपूर्ति के लिए जूट बोरे उपलब्ध कराए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार पूर्व में वर्षों में खरीद की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जूट आयुक्त कोलकाता को बोरों की आपूर्ति के लिए इंडेंट भेज दिया जाता था।
इस सत्र में नवंबर में 80 हजार गांठ जूट बोरे मंगाए गए थे, उस समय बाेरों की प्रति गांठ का मूल्य 35,470 रुपये रुपये था। इसके बाद पांच जनवरी को 87, हजार गांठ जूट बोरों के क्रय के लिए इंडेंट भेजकर 308.59 करोड़ रुपये की धनराशि जमा कराई गई थी, परंतु 14 जनवरी से क्रियाशील हुए नए ‘जूट स्मार्ट पोर्टल’ पर जूट बोरों की दर 48,322.03 रुपये प्रति गांठ प्रदर्शित की गई।
इस हिसाब से 87 हजार गांठ पर व्यय 420.25 करोड़ हो रहा है और 111.66 करोड़ रुपये की और आवश्यकता है। इस बार भेजी गई धनराशि और पिछले इंडेंट की शेष 38.29 करोड़ रुपये की धनराशि को मिलकर भी कुल धनराशि 346.88 करोड़ रुपये बैठ रही है।
ऐसे में विभाग ने तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर फिलहाल 71,787 गांठ जूट बोरे मंगाए हैं और उनका जिलावार आवंटन कर दिया गया है।
मामले में खरीद प्रभारी संभागीय खाद्य नियंत्रक अशोक कुमार पाल ने बताया कि इस बार कीमत बढ़ गई हैं, परंतु इससे प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। शेष राशि के लिए व्यवस्था की जा रही है।
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