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स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खामियां दूर कर ही उपभोक्ताओं पर हो कार्रवाई, उपभोक्ता परिषद की मांग

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। स्मार्ट प्रीपेड मीटर में तकनीकी खामियों का खामियाजा बिजली उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। नौ लाख से अधिक मीटर में खामियों के चलते ही उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चल पा रहा है कि बैंलस की स्थिति क्या है?

बैलेंस प्लस है या माइनस यह पता न होने पर भी उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई होने की शिकायतें मिल रही है। ऐसी शिकायतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने मीटर की तकनीकी खामियां दूर होने तक उपभोक्ताओं पर किसी तरह की कार्रवाई न करने की मांग की है।

अब तक लगभग 61 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं जिसमें 47,43,499 मीटर प्रीपेड मोड में संचालित बताए जा रहे हैं। वर्मा का कहना है कि जीनस कंपनी के नौ लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर में उपभोक्ता को बैलेंस के बारे में पता नहीं चल पा रहा है।

इनमें दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लगभग 3,56,788, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के ही लगभग 4,78,970 स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं। केस्को कंपनी में भी लगभग 72,195 स्मार्ट प्रीपेड मीटर जीनस के लगे हैं। अन्य कंपनियों के मीटर में भी तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि लगभग मीटर में लगभग 1097 करोड़ रुपये का नेगेटिव बैलेंस हो गया है जिसके आधार पर संबंधित उपभोक्ता पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।

परिषद अध्यक्ष ने बताया कि शिकायतों और फीडबैक के बारे में पावर कारपोरेशन के स्मार्ट प्रीपेड मीटर विंग एवं संबंधित निदेशक को बताया जा चुका है। विद्युत नियामक आयोग के आदेशानुसार उपभोक्ताओं को मिलने वाली मासिक प्रीपेड बिल समरी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
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