अब दिल्ली की तरह चमकेगा मेरठ, हर माह एक करोड़ खर्च करेगा नगर निगम; ये है पूरा प्लान
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/Meerut-1768062519580.jpgसंजीव जैन, मेरठ। दिल्ली नगर निगम( एमसीडी) की तर्ज पर नगर निगम क्षेत्र के सभी प्रमुख बाजार, मुख्य मार्गो व व्यवसायिक काम्प्लेक्स में सफाई का जिम्मा प्राइवेट कपंनी का रहेगा। सोमवार को इसके लिए निगम टेेडर आमंत्रित करेगा। इस प्रक्रिया पर निगम का हर माह करीब एक करोड़ खर्च होगा। संविदा में काम कर रहे 150 कर्मचारी, मशीन व उपकरण निगम द्वारा कंपनी को उपलब्ध कराया जाएगा।
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि मेरठ नगर निगम द्वारा आबूलेन, बेगमपुल, शास्त्री नगर सेंट्रल मार्किट, खैर नगर समेत शहर के बाजारों, मुख्य मार्गो व व्यवसायिक काम्प्लेक्स की सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए निजी कंपनी की मदद ली जाएगी। जिसके तहत सड़कों की सफाई जैसे काम प्राइवेट एजेंसियों से कराए जाएंगे, ताकि सफाई व्यवस्था में सुधार हो और शहर को स्वच्छ बनाया जा सके, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अभी निगम की सेवाएं पूरी तरह नहीं पहुँच पा रही हैं।
उन्होंंने बताया कि नगर निगम इस कंपनी के काम की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि तय मानकों के अनुसार सफाई हो। बताया कि सोमवार को इसके लिए टेंडर जारी होगा। प्राइवेट कंपनी बाजार की सड़कों और गलियों की साफ सफाई से लेकर बाजार में बने टायलेट की सफाई भी कराएगी। हर महीने इस योजना पर करीब एक करोड़ का खर्च आने की उम्मीद है। बताया कि दिल्ली में यह योजना कामयाब रही।
कूड़े की वजह से प्रदेश के टाप-10 स्वच्छ शहरों की सूची में जगह नहीं बना सका मेरठ
स्वच्छता के मामले में प्रदेश के टाप-10 स्वच्छ शहरों की सूची में मेरठ जगह नहीं बना सका। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 की प्रतिस्पर्धा में कम बजट और कम आबादी वाले नगर निगमों ने भी 1524 करोड़ वार्षिक बजट वाले मेरठ को पछाड़ दिया है। प्रदेश की रैंकिंग सूची में शामिल 17 नगर निगमों में मेरठ स्वच्छता के मामले में नीचे से चौथे स्थान पर रहा।
पिछले वर्ष भी स्वच्छता में मेरठ प्रदेश में फिसड्डी था। इस बार भी वही स्थिति रही। मेरठ नगर निगम पिछले वर्ष की रैंकिंग भी नहीं बचा सका। 54 प्रतिशत घरों से गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग लेने की व्यवस्था नहीं बना सके। जबकि इसके लिए 73 वार्डों में बीवीजी कंपनी को ठेका है।
गांवड़ी में एनटीपीसी का प्लांट हो या फिर प्रोसेसिंग प्लांट। दोनों ही नहीं लगे। प्रतिदिन शहर में 1100 टन कूड़ा उत्सर्जित होता है। निस्तारण बमुश्किल 300 टन होता है। 3-3 प्रतिशत आवासीय व बाजार क्षेत्रों की सफाई सर्वेक्षण में कम पायी गई है। हालांकि स्थिति और भी खराब है। 2 प्रतिशत सार्वजनिक और सामुदायिक शौचायलों की सफाई कम मिली है।
स्थिति तो ये है कि अधिकांश में ताले लटक रहे हैं। गार्बेज फ्री सिटी यानी कचरा मुक्त शहर की श्रेणी में नगर निगम शहर के अंदर के खत्ते समाप्त करने में नाकाम रहा। वर्तमान में 100 से ज्यादा स्थानों पर खत्ते मौजूद हैं। सर्वेक्षण की टीम को कूड़े के पहाड़ से लेकर सड़क किनारे कचरे के ढेर दिखे। जिससे 5-स्टार रेटिंग का दावा औंधे मुंह गिर गया।
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