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अब विदेश से आएगी बिजली! भारत, सऊदी और UAE का ऐतिहासिक गठबंधन; समुद्र के नीचे बिछेगी पावर केबल

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी में है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ मिलकर भारत एक अनोखे ऊर्जा एक्सचेंज प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसमें समुद्र के नीचे पावर केबल बिछाई जाएगी। इस परियोजना के तहत भारत सरकार जल्द ही निविदा जारी करेगी, जिससे इन दोनों खाड़ी देशों से भारत तक बिजली का निर्बाध आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। बिजली मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दैनिक जागरण को बताया कि इस एक्सचेंज से जरूरत पड़ने पर भारत इन देशों को बिजली की आपूर्ति भी कर सकेगा।

यह परियोजना ऐसे समय में आ रही है जब तेल संसाधनों से समृद्ध सऊदी अरब और यूएई भविष्य में जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि हाल ही में समुद्र के नीचे बिजली आपूर्ति करने वाली केबल लाइन बिछाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया गया है। परियोजना पूरी होने पर यह दुनिया का सबसे सीमा-पार एनर्जी एक्सचेंज बन सकता है। यह कदम न केवल ऊर्जा क्रांति का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक सहयोग की मिसाल भी पेश करेगा।

बता दें कि भारत अभी तक अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सऊदी अरब और यूएई पर निर्भर है। भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा इन दोनों देशों से करता है। लेकिन ये दोनों देश भविष्य में भारत को एक ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश के तौर पर भी देख रहे हैं। भारत की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जैसे- सौर और पवन ऊर्जा, इस गठबंधन को मजबूती प्रदान करेगी। समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करेंट (एचवीडीसी) केबल्स से बिजली का कुशल ट्रांसमिशन सुनिश्चित होगा, जो ऊर्जा हानि को न्यूनतम रखते हुए लंबी दूरी तय कर सकेगी।

यह गठबंधन तीनों देशों के लिए आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक लाभ भी सुनिश्चित करेगा। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और यहां ऊर्जा की खपत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है। यह स्थिति लंबे समय तक रहने की संभावना है। इस परियोजना से भारत को सऊदी अरब और यूएई से सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा आयात करने का अवसर मिलेगा। खासकर उन समयों में जब घरेलू उत्पादन में कमी हो। वैसे रेगिस्तानी इलाके में सौर ऊर्जा उत्पादन में कई तरह की चुनौतियां होती हैं लेकिन सऊदी अरब से भारत तीन घंटे आगे है। यानी सऊदी में देर शाम तक सौर ऊर्जा से तैयार बिजली को रियल टाइम में भारत आयात किया जा सकता है। दिन के अन्य समय भारत में तैयार सौर बिजली की आपूर्ति सऊदी अरब और यूएई को हो सकेगी। साथ ही सौर ऊर्जा में भारत इन दोनों देशों को प्रौद्योगिकी व मैन-पावर देगा।

यह एनर्जी एक्सचेंज तीनों देशों के बीच ऊर्जा ग्रिड को इंटरकनेक्ट करेगा, जिससे बिजली की कमी या अधिशेष की स्थिति में तत्काल सहायता संभव होगी। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाएगा और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में योगदान देगा। माना जा रहा है कि उक्त ऊर्जा गठबंधन भारत, सऊदी अरब और यूएई के बीच पहले से मजबूत रणनीतिक संबंधों को और गहराई प्रदान करेगा।
नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस कर रहा सऊदी अरब

तेल पर आधारित अर्थव्यवस्था वाला सऊदी अरब \“विजन 2030\“ के तहत जीवाश्म ईंधन से दूर हटकर नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस कर रहा है। इस गठबंधन से सऊदी को भारत से सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा आयात करने का विकल्प मिलेगा, जो उसके घरेलू ग्रिड को स्थिर रखने में मदद करेगा। सऊदी अरब सरकार वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार ऊर्जा उत्पादक देश के तौर पर अपनी छवि बनाने की कोशिश कर रही है। इसी तरह से यूएई ने \“नेट जीरो 2050\“ का लक्ष्य रखा है। वहां नवीकरणीय ऊर्जा में भारी निवेश किया जा रहा है। लेकिन बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक मांग के कारण वहां वर्ष 20230 के बाद स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत तेजी से बढ़ने की संभावना है। साथ ही, यह गठबंधन यूएई को ऊर्जा व्यापार में एक क्षेत्रीय हब बनाने में मदद करेगा, जहां वह अन्य खाड़ी देशों के साथ भी समन्वय कर सकेगा।
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