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SIR in UP: नोटिस से पहले ही हरकत में आए बीएलओ, कैसे बचाएंगे वोटरों के नाम?

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जागरण संवाददाात, गोरखपुर। जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-एसआइआर अभियान के तहत अनंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 जनवरी को हो चुका है। इसके साथ ही अब अभियान का सबसे अहम चरण शुरू हो गया है, जिसमें मतदाताओं से अपनी प्रविष्टियों की स्वयं जांच करने की अपील की जा रही है। निर्वाचन प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए और सभी योग्य मतदाताओं का नाम अंतिम सूची में सुरक्षित रहे।

जिला निर्वाचन अधिकारी व डीएम दीपक मीणा ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए यह निर्देशित किया है कि नोटिस आने से पहले ही बीएलओ अपने स्तर से बिना मैपिंग वाले मतदाताओं के घर जाकर संपर्क करें। उनसे आवश्यक प्रमाण पत्र लेकर सुरक्षित रखें, ताकि नोटिस मिलते ही उसका जवाब तत्काल आनलाइन अपलोड किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से मतदाता सूची से न कटे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी की भागीदारी बनी रहे।

जिले में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से जुड़े करीब 3.22 लाख मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है। ऐसे मतदाताओं की पहचान कर उनका सत्यापन करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। नियमानुसार इन सभी मतदाताओं को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से नोटिस जारी किए जाने हैं, जिनका जवाब देने की अंतिम तिथि 6 फरवरी निर्धारित की गई है।

हालांकि, अभी तक नोटिस जारी न होने के कारण एक ओर लाखों मतदाता असमंजस में हैं, वहीं दूसरी ओर बीएलओ भी नोटिस का इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीएम दीपक मीणा ने सभी बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नोटिस शीघ्र जारी कर दी जाएगी, जिसके बाद बीएलओ डोर टू डोर जाकर उसका वितरण सुनिश्चित करें।

डीएम का कहना है कि चूंकि बिना मैपिंग वाले मतदाता पहले से चिह्नित हैं, उन्हें तलाशना नहीं है। ऐसे में बीएलओ नोटिस का इंतजार छोड़ पहले ही संबंधित मतदाता से संपर्क कर उन्हें संबंधित प्रमाण पत्रों की जानकारी दें और उनसे उसे प्राप्त कर सुरक्षित रखें ताकि जैसे ही नोटिस जारी हो, जवाब भी अपलोड करने का काम शुरू हो जाए।

डीएम ने यह भी निर्देशित किया है कि नोटिस आने से पहले ही बीएलओ अपने स्तर से बिना मैपिंग वाले मतदाताओं के घर जाकर संपर्क करें। उनसे आवश्यक प्रमाण पत्र लेकर सुरक्षित रखें, ताकि नोटिस मिलते ही उसका जवाब तत्काल आनलाइन अपलोड किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से मतदाता सूची से न कटे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी की भागीदारी बनी रहे।
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