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हाइपरसोनिक मिसाइलों से अब ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक तेज होगा प्रहार, स्क्रैमजेट इंजन का हुआ सफल परीक्षण

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12 मिनट से अधिक का रन टाइम हासिल किया गया



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से आने वाले समय में अब दुश्मन पर ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक तेज गति से प्रहार संभव हो पाएगा। हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला - रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है।

डीआरडीएल ने 9 जनवरी, 2026 को अपनी अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (एससीपीटी) केंद्र में अपने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट फुल स्केल कंबस्टर का सफलतापूर्वक एक व्यापक दीर्घकालिक जमीनी परीक्षण किया, जिसमें 12 मिनट से अधिक का रन टाइम हासिल किया गया।

रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, यह महत्वपूर्ण उपलब्धि 25 अप्रैल, 2025 को किए गए पूर्व लघु परीक्षण पर आधारित है, जो लंबी अवधि का परीक्षण था। यह हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। कंबस्टर और परीक्षण केंद्र का डिजाइन और विकास डीआरडीएल द्वारा किया गया और इसे उद्योग भागीदारों द्वारा साकार किया गया। बयान में कहा गया है कि इस सफल परीक्षण से भारत उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं में अग्रणी स्थान पर आ गया है।
6100 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक (6,100 किमी/घंटे से अधिक) गति से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग इंजन के माध्यम से हासिल की जाती है, जो लंबी अवधि की उड़ान को बनाए रखने के लिए सुपरसोनिक कंबशन का उपयोग करता है। एससीपीटी केंद्र में किए गए जमीनी परीक्षणों ने उन्नत स्क्रैमजेट कंबस्टर के डिजाइन के साथ-साथ अत्याधुनिक परीक्षण केंद्र की क्षमताओं को सफलतापूर्वक मान्य किया है।
रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड लांग ड्यूरेशन स्क्रैमजेट इंजन के सफल ग्राउंड परीक्षण के लिए डीआरडीओ, उद्योग भागीदारों और शिक्षाविदों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए ठोस आधार है। एक्स पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्री ने लिखा, “हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला डीआरडीएल ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है।“

एक जनवरी को डीआरडीओ मुख्यालय में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा था कि डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियारों ने आपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
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