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मामू, ममदानी और बुर्केवाली पर आ टिका बीएमसी चुनाव

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बीएमसी चुनाव। (फाइल)



ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। स्थानीय निकाय चुनाव सामान्यतः आम नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं पर लड़े जाते हैं। लेकिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई महानगरपालिका का चुनाव इस बार सड़क, नाली और साफ पानी के बजाय मामू, बुर्केवाली और ममदानी पर आ टिका है।

कांग्रेस एवं शिवसेना (यूबीटी) मुस्लिम मतदाताओं को रिझाकर वोट बटोरने का प्रयास कर रहे हैं, तो भाजपानीत गठबंधन इसी मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) को घेरकर हिंदूओं के वोट लेना चाहता है।

कुछ ही दिनों पहले एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने ये कहकर एक नई बहस शुरू कर दी कि जब ‘आई लव महादेव’ कहने वाला मुंबई का मेयर बन सकता है, तो ‘आई लव मोहम्मद’ कहने वाला एवं कोई ‘हिजाब पहनने वाली’ मुंबई की मेयर क्यों नहीं बन सकती।

पठान के इस बयान पर शिवसेना (यूबीटी) की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तो भाजपा ने इसे लपककर मुद्दा बना दिया कि उद्धव ठाकरे वारिस पठान की बात का जवाब देकर मुस्लिमों को नाराज नहीं करना चाहते।

भाजपा इससे पहले छत्रपति संभाजी नगर में कांग्रेस के मुस्लिम नेता रशीद मामू को स्वयं उद्धव ठाकरे द्वारा अपनी पार्टी में शामिल करने पर घेरती आ रही थी। भाजपा की ओर से तो उद्धव ठाकरे को इन दिनों एक नया नाम ‘उद्धव मामू’ ही दे दिया गया है। इसी बहस के बीच जब न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर अपने पद की शपथ ली, तो मुंबई में कांग्रेस विधायक असलम शेख ने यह कहकर एक नया संकेत दे दिया कि मुंबई का मेयर तो जोहरान ममदानी जैसा होना चाहिए।

इस पर मुंबई भाजपा के अध्यक्ष अमित साटम ने असलम शेख को यह कहकर घेरा कि क्या वही ममदानी जो भारत तेरे टुकड़े होंगे कहनेवाले उमर खालिद का समर्थन करता है, और जिस पर यूएपीए के तहत केस दर्ज है ?

असलम शेख मुंबई में मालवणी क्षेत्र के विधायक हैं, जहां रोहिंग्या एवं बंग्लादेशी मुस्लिमों को योजनाबद्ध तरीके से बसाए जाने का आरोप भाजपा मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा लंबे समय से लगाते रहे हैं। अब अमित साटम ने भी कहा है कि मालाड-मालवणी क्षेत्र में चार महीने में ही मुस्लिम आबादी 10,000 बढ़ गई है।

मुंबई में मुस्लिम आबादी बढ़ने का आरोप भाजपा नेता किरीट सोमैया भी लगाते हैं। प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्था टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (टिस) की एक रिपोर्ट के हवाले से सोमैया ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि 1961 में मुंबई में मुस्लिम आबादी सिर्फ आठ प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई, और 2051 तक यह आबादी 30 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

सोमैया आरोप लगाते हैं कि सुनियोजित तरीके से मुंबई की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश की जा रही है। मुस्लिमों की इसी आबादी के कारण मुंबई के 227 में से करीब 60 वार्डों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जिसके कारण 2017 के बीएमसी चुनाव में सभी प्रमुख दलों के 31 मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर आए थे।

इनमें कांग्रेस के 11, समाजवादी पार्टी के सात एवं एआईएमआईएम के तीन उम्मीदवार शामिल थे। इस बार मुस्लिम मतों में बड़ी सेंध शिवसेना (यूबीटी) भी लगा सकती है। क्योंकि पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में भी उसे मुस्लिम मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिला था।
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