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भूरे हों या समीर, जिला अस्पताल में हर तीमारदार की एक ही कहानी– दर्द और बेबसी!

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ज‍िला अस्‍पताल में ताला पड़ी श‍िकायत पेट‍िका



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। डिजिटल दौर की चमक के बीच जिला अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की आवाज़ दम तोड़ती नजर आ रही है। समस्याएं दर्ज कराने के लिए लगाई गई शिकायत-सुझाव पेटियां खुद बदहाली का शिकार हैं। कहीं ताले जाम हैं तो कहीं पेटियां क्षतिग्रस्त, नतीजा यह कि मरीज अपनी पीड़ा लिख ही नहीं पाते।

अस्पताल प्रबंधन भले ही हर सप्ताह जांच का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शिकायत पेटियों पर भरोसा टूट चुका है और पीड़ितों की आवाज या तो दब रही है या डिजिटल पोर्टल के जाल में उलझकर रह जा रही है। पंडित दीन दयाल जिला चिकित्सालय में मरीज और तीमारदारों को आने वाली दिक्कताें को दूर करने और उनके सुझाव लेने के लिए परिसर में कुल आठ शिकायत पेटी लगाई गई हैं।

इनमें तीन ओपीडी भवन, तीन आईपीडी भवन और ट्रामा सेंटर आदि में स्थापित हैं। इनमें कुछ माह पहले तक अस्पताल के पास शिकायतें भी मिलती थी लेकिन वर्तमान पेटियों को तोड़ने और छेड़ने के कारण मरीज और उनके तीमारदार शिकायत-सुझाव देने से बचते हैं।

यह पेटियां उन लोगों के लिए सहयोगी हैं जो डिजिटल प्रयोग से सीएम पोर्टल में अपनी समस्याएं नहीं दे पाते है और तत्काल समाधान चाहते हैं, लेकिन इन पेटियों के बदहाल रहने से इनमें शिकायत देने पर सुनवाई होगी या समाधान होगा कि नहीं यह उलझन बन जाती है।
सप्ताहभर में खोली जाती है पेटिका

अस्पताल में शिकायत देने के लिए बनाई गई पेटिका को सप्ताहभर में खोलने की व्यवस्था है ऐसे में भी पेटिकाओं की निगरानी नहीं होती है। जिससे कि पेटियों की हालत खस्ताहाल हो रही है।
सीएम पोर्टल पर हर माह मिलती हैं 10 से 15 शिकायतें

वर्तमान में जिला अस्पताल संबंधी शिकायतें आईजीआरएस एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से आती है। इनकी समीक्षा होने और समाधान होने में समय लगता है ऐसे में मरीज और तीमारदार शिकायत पेटिका को बेहतर विकल्प समझ रहे हैं।
मरीज-तीमारदारों के मन की बात

कुंदरकी से आए मरीज के तीमारदार समीर ने बताया क‍ि मेरे भतीजे के पैर में चोट लगी थी दिखाने लाये तो पर्चा बनाने, डाक्टर को दिखाने में समय लग गया। आज अस्पताल जल्दी बंद हो गया अब दवा निजी स्टोर से लेनी पड़ेगी। दवा काउंटर देर तक खोलने के लिए सुझाव देना था, शिकायत पेटी खराब है लिखें भी तो पता नहीं कोई देखेगा या नहींं।

मझोला के रहने वाले भूरे ने अपना दर्द बताते हुए कहा क‍ि हमारे चाचा के सीने में दर्द है उन्हें दिखाने लाये थे एक्सरे कराने आदि समय लग गया। ऐसे में दवा भी नहीं ले पाये और डाक्टर से भी दोबारा परामर्श लेने के लिए अब सोमवार को आना पड़ेगा। अगर यहां हम अपनी समस्याएं लिखकर बताएं तो पेटिका टूटी हुई है ऑनलाइन चलाना नहीं आता है।




खराब पेटिकाओं को बदला जायेगा। इसके लिए पत्र देकर प्रस्ताव दिया है। पेटिका में मिलने वाली शिकायत और सुझाव पर तुरंत अमल होता है। डिजिटल मिलने वाली शिकायतों को भी तुरंत हल कराया जाता है।

- डा. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्साधीक्षक जिला अस्पताल, मुरादाबाद।





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