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कानपुर की 3 फर्मों का महाघोटाला: 107 करोड़ का कारोबार और ₹18 करोड़ की GST डकार गए!

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प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जीएसटी चोरी का एक और मामला सामने आया है। मुरादाबाद में स्क्रैप से भरे एक ट्रक की जांच के दौरान कानपुर की तीन फर्मों द्वारा जीएसटी चोरी किए जाने का मामला पकड़ा है। शुरुआती जांच में सामने आया कि इन तीनों फर्मों ने लगभग 107 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर 18 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की है।

सभी फर्में कानपुर में पंजीकृत हैं, जबकि माल का आवागमन अन्य जिलों और राज्यों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। यह मामला उस समय सामने आया जब राज्यकर विभाग की सचल दल टीम ने मुरादाबाद हाईवे पर नियमित चेकिंग के दौरान स्क्रैप से भरे ट्रक को रोका। दस्तावेज की जांच में ई-वेबिल, जीएसटी रिटर्न और पोर्टल पर दर्ज विवरण में गड़बड़ी मिली।

टीम ने ट्रक और उससे जुड़े दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। वहीं स्क्रैप सेगमेंट में 5473 करोड़ के टर्नओवर पर 989.13 कराेड़ की जीएसटी चोरी में चार लोगों को एसआइटी जेल भेज चुकी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें भी कई अन्य फर्मों के नाम सामने आ सकते हैं।

राज्यकर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। विभाग को आशंका है कि ये तीनों फर्में केवल कागजों पर कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का गलत लाभ उठा रही थीं। साथ ही यह भी संदेह जताया जा रहा है कि कहीं इन फर्मों का संबंध बोगस फर्मों के किसी बड़े रैकेट से तो नहीं है, जो लंबे समय से जीएसटी चोरी को अंजाम दे रहा है।

जांच एजेंसियां अब इन फर्मों की जीएसटी पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारियों को खंगाल रही हैं। रिटर्न फाइलिंग, ई-वेबिल जनरेशन, माल की खरीद-बिक्री और बैंक लेनदेन की भी बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया टर्नओवर और टैक्स भुगतान में बड़ा अंतर सामने आया है, जो सुनियोजित कर चोरी की ओर इशारा करता है।

इस प्रकरण के बाद राज्यकर विभाग ने स्क्रैप कारोबार से जुड़े अन्य मामलों की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों अनुसार, स्क्रैप के कारोबार में अक्सर फर्जी बिलिंग और बोगस फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी की जाती है। इसी को देखते हुए हाईवे पर चेकिंग और सख्त कर दी गई है।

सचल दल की कई टीमें सक्रिय रूप से वाहनों की जांच कर रही हैं, ताकि पोर्टल पर अपलोड होने वाले प्रत्येक ई-वेबिल का भौतिक सत्यापन किया जा सके। अपर आयुक्त ग्रेड टू एसआइबी आरए सेठ ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद दोषी फर्मों के खिलाफ न केवल टैक्स वसूली की कार्रवाई की जाएगी, बल्कि जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी चोरी सामने आने की संभावना है।




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