Chikheang Publish time Yesterday 18:57

यूपी के इस जिले में बंदरों की मौत का सिलसिला जारी, अभी भी कई बीमार

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/27_09_2024-monkey_population_23805703-1768052478120.jpg



संवाद सहयोगी, चंदौसी। चंदौसी में बंदरों की मौत अब महज एक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही का गंभीर संकेत बन चुकी है। केवल 10 से 11 दिनों के भीतर 32 बंदरों की मौत और इसके बाद भी दो और बंदरों का दम तोड़ देना यह बताने के लिए काफी है कि हालात कितने चिंताजनक हैं।

एक ही तरह के लक्षण, एक ही क्षेत्र और लगातार बढ़ता मृतकों का आंकड़ा होने के बावजूद समय से जांच, पोस्टमार्टम और ठोस उपचार व्यवस्था नहीं की गई। पशु प्रेमी अलाव जलाकर, चारा डालकर जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि पशुपालन विभाग की कार्रवाई दवा खिलाने और सुधार के दावों तक सीमित नजर आ रही है। यदि हालात पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

चंदाैसी में सीता रोड स्थित श्मशान घाट और आसपास के इलाके में अज्ञात बीमारी से बीते 10 से 11 दिनों में 32 बंदरों की मौत हो गई। पहले तो लोग इसे सामान्य समझते रहे, लेकिन शुक्रवार की सुबह छह बंदरों की मौत होने पर लोग अचंभित हो गए। मरने से पहले सभी बंदरों में एक जैसे बीमारी के लक्षण दिखाई दिए थे, जबकि एक दर्जन से अधिक मरणासन्न स्थिति में थे।

शहर के मंतेश वार्ष्णेय, कौशल किशोर, विनोद शर्मा आदि लोगों को जानकारी हुई तो वह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने शहर में लगातार हो रही बंदरों की मौत के बारे में प्रशासन को अवगत कराया। इसके बाद डिप्टी सीवीओ ने मौके पर पहुंचकर बंदरों की स्थिति देखी और उपचार शुरू किया, लेकिन रात को फिर दो बंदरों की मौत हो गई। शनिवार को सुबह लोगों ने उन्हें दफना दिया। सुबह दस बजे डिप्टी सीवीओ ने फिर से बंदरों की स्थिति देखी और उपचार किया।

उधर, नगर पालिका का इन दिनों बंदरों को पकड़ने का अभियान चल रहा है, ताकि लोगों को बंदरों के आतंक से निजात मिल सके। अभी तक शहर के विभिन्न हिस्सों से 1500 से अधिक बंदर पकड़े गए हैं। शनिवार को मथुरा की टीम ने सामुदायिक अस्पताल से 51 बंदर पकड़े और जंगल में छोड़ दिए। वहीं, आटा गांव में मरे बंदरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है

आम दिनों में उछलकूद करने वाले बंदर दिखे सहमे और सुस्त

जागरण की टीम ने बंदरों का हाल जानने के लिए पड़ताल की। जहां, सीता रोड श्मशाम घाट पर यहां तीन दिन पहले तक बंदरों के झुंड मंदिर परिसर और पेड़ों पर उछल कूद करते दिखाई देते थे, लेकिन शनिवार को यहां की स्थिति बदली हुई थी। यहां अधिकांश बंदरों में चंचलता दिखाई नहीं दी। धूप निकलने के बाद भी पेड़ और छतों पर कोई बंदर दिखाई नहीं दिया। कुछ बंदर परिसर में इधर उधर बैठे थे, जो अस्वस्थ थे।

अमूमन खाने की तलाश में लोगों पर झपटने वाले बंदरों में, खीने पीने की चीजें सामने होने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी। यहां मौजूद लोगों ने बताया कि दो दिन पहले तक बंदरों की खूब धमा -चौकड़ी रहती थी। यहां आने वाले लोगों को देखते ही बंदर घुड़की देते दिखाई देते थे, लेकिन अब अस्वस्थ होने की वजह से सुस्त हैं। जगह जगह खाने के लिए चना परवल पड़े हैं, लेकिन उनको खाने में दिलचस्पी नहीं है।


श्मशान घाट परिसर में रात के समय अलाव लगवाए, ताकि बीमार बंदर ठंड से बचे रहे। इसके बाद भी दो बंदरों की मौत हो गई, जिन्हें दफना दिया है। अभी भी कई बंदर बीमार है। पशु पालन विभाग को बंदरों की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। - मंतेश वार्ष्णेय, पशु प्रेमी चंदौसी

बंदरों को खाने पीने के लिए चना परवल की व्यवस्था करा दी है, लेकिन अभी कई बंदर पूरी तरह अस्वस्थ दिखाई दे रहे हैं। उनमें पहले जैसी चंचलता नहीं दिख रही है। ठीक से कुछ खा नहीं रहे हैं। -कौशल किशोर वंदेमातरम, चंदौसी

श्मशान परिसर में रोजाना बंदरों की उछलकूद रहती थी, लेकिन बीमार होने की वजह से बंदर पूरी तरह सुस्त हैं। ज्यादा चल फिर भी नहीं रहे हैं। सुबह पशु चिकित्सक ने बंदरों को उपचार दिया। -ओमवीर सिंह, चौकीदार

बंदरों की तबीयत में काफी सुधार देखने को मिला है। शनिवार को फिर से दवा खिलाई है, उम्मीद है जल्द स्वास्थ्य लाभ होगा। आटा वाले बंदरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए भी संपर्क किया जा रहा है। उससे बंदर के मौत की सही वजह मालूम पड़ेगी। -डा अजय कुमार, डिप्टी सीवीओ
Pages: [1]
View full version: यूपी के इस जिले में बंदरों की मौत का सिलसिला जारी, अभी भी कई बीमार

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com