सांसद पप्पू यादव अचानक पहुंचे पूर्णिया GMCH; शिशु वार्ड की हालत देख हुए नाराज; DM को फोन कर बताई एक-एक बात
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/PAPPU-YADAV-NEWS-(10)-1768052222539.jpgपप्पू यादव ने किया औचक निरीक्षण। (जागरण)
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आज जीएमसीएच (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल) के शिशु वार्ड का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल की गंभीर कुव्यवस्था सामने आने पर सांसद काफी नाराज दिखे। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से तीखे सवाल किए और कहा कि शिशु एवं माताओं के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्हें बंद लिफ्ट का संज्ञान भी लिया और ठेकेदार से बात कर फटकार लगाई, जिसके बाद ठेकेदार को उन्होंने 2 महीने के अंदर सभी वार्ड में फर्नीचर, बेड और लिफ्ट ठीक करने का सख्त निर्देश दिया।
निरीक्षण के दौरान शिशु वार्ड की हालत बेहद चिंताजनक पाई गई। एक ही कमरे में ठंड से बचने के लिए झोपड़ी जैसी अस्थायी संरचना बनाकर 300 से अधिक महिलाएं रहने को मजबूर थीं। मरीजों और उनके परिजनों ने सांसद को बताया कि अस्पताल में सुविधा के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं है। दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, जांचें निजी लैब में करानी पड़ रही हैं और रक्त की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
इससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों को भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सांसद पप्पू यादव के साथ निरीक्षण के दौरान अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट भी मौजूद रहे।
डीएम को फोन कर मामले की दी जानकारी
सांसद ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि शिशु वार्ड से जुड़ी सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे हर 15 दिन पर निरीक्षण करेंगे और इस गंभीर मुद्दे को लोकसभा में प्रमुखता से उठाएंगे। साथ ही सांसद ने जिला अधिकारी से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी दी और तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालने को कहा।
निरीक्षण के बाद सांसद पप्पू यादव ने अस्पताल की स्थिति पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। शिशु वार्ड जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की अव्यवस्था न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को भी दर्शाती है।
इस दौरान सांसद ने निजी क्लीनिक और प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों से भी मानवीय अपील की। उन्होंने कहा कि 15 दिनों में बार-बार फीस लेने की बजाय 3 महीने में फीस ली जाए, ताकि आम और गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हो।
सांसद ने भरोसा दिलाया कि वे जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करते रहेंगे और जीएमसीएच की व्यवस्था सुधारना उनकी प्राथमिकता है।मौके पर डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. भरत डॉ दिनबंधू सहित अन्य लोग मौजूद थे।
Pages:
[1]