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Chanakya Niti: जीवन में उतारेंगे चाणक्य की ये बातें, तो कभी नहीं टूटेगा होसला

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सफल जीवन के लिए चाणक्य नीति (AI Generated Image)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आचार्य चाणक्य ने \“चाणक्य नीति\“ में राजनीति और कूटनीति से लेकर पारिवारिक जीवन के बारे में भी विस्तार से वर्णन किया है। ऐसे में आज हम आपको चाणक्य नीति (chanakya niti tips) की कुछ जरूरी बातें बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको अपने जीवन में जरूर उतारना चाहिए।
1. जरूर ध्यान रखें ये बात

“न स्नेहात् कृत्वा विघ्नं न द्वेषात् न च लोभतः।
न मोहत् कार्यमत्यन्तं कार्यं कार्यवदाचरेत्॥“

इस श्लोक में कहा गया है कि किसी भी काम को प्रेम, नफरत, लालच या फिर भ्रम मोह में आकर नहीं करना चाहिए। बल्कि उसे केवल कर्तव्य समझकर वैसे ही करना चाहिए जैसे वह वास्तव में करने लायक है। जब आप इस तरह से कोई काम करते हैं, तो इससे निर्णय सही और टिकाऊ होता है। यह निष्पक्षता और विवेकपूर्ण आचरण का महत्व बताता है।

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(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
2. मुश्किल समय में काम आएगी ये बात

आपदर्थे धनं रक्षेच्छ्रीमतां कुत आपदः ।
कदाचिच्चलते लक्ष्मीः सञ्चितोऽपि विनश्यति ॥

चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि व्यक्ति को कठिन समय से निपटने के लिए धन का संचय करना चाहिए। क्योंकि यह माना गया है कि धन कि देवी लक्ष्मी चंचल स्वभाव की हैं। ऐसे में पैसा हर समय व्यक्ति के पास नहीं टिकता, बल्कि आपका जमा किया हुआ धन भी नष्ट हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को यह सोचने की गलती नहीं करनी चाहिए कि अमीर व्यक्ति पर कभी कोई संकट नहीं आता।
3. जीवन में न करें ये गलती

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥

इस श्लोक में बताया गया है कि जो व्यक्ति कसी नाशवंत चीज यानी नष्ट हो जाने वाली वस्तु के लिए, कभी नाश नहीं होने वाली चीज को छोड़ देता है, तो उसके हाथ से अविनाशी वस्तु भी चली जाती है और इसमें कोई संदेह नहीं की नाशवान को भी वह खो देता है। अंत में वह खाली हाथ ही रह जाता है।

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(AI Generated Image)
4. ऐसे लोगों से करें अपना बचाव

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम् ।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ॥

चाणक्य नीति के इस श्लोक का मतलब है कि व्यक्ति को अपने जीवन नें ऐसे लोगों से बचना चाहिए, जो आपके मुंह पर तो मीठी बातें करते हैं, लेकिन आपके पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते हैं। आचार्य चाणक्य ने ऐसे लोगों की तुलना उस विष के घड़े से की है, जिसकी ऊपरी सतह दूध से भरी दिखाई देती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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