आजमगढ़ के मदरसा शिक्षक शमशुल मामले में मदरसा के 85 कर्मियों के वेतन भुगतान पर लगी रोक
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/madarasa-1768046731556.jpgशमशुल हुदा पर विदेशी धन एकत्र करने का आरोप है, जबकि वह भारतीय नागरिकता त्याग चुके थे।
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। एटीएस जांच में मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान की केंद्रीय भूमिका सामने आने पर दो मदरसों पर र्रवाई की गई है। मदरसा शिक्षा परिषद ने संत कबीर नगर स्थित मदरसा बनातिर रजविया (निस्वां)और आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है।
आजमगढ़ के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल के प्रिंसिपल सहित 85 शिक्षक व अन्य कर्मियों के जनवरी माह से ही वेतन और अन्य किसी भी भुगतान पर रोक लगा दी गई है। मान्यता निलंबित करने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए शुक्रवार को ही रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में पत्र प्रेषित कर दिया।
एटीएस की रिपोर्ट के अनुसार संत कबीर नगर के मोहल्ला रजा नगर की रजा मंजिल निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान वर्ष 2007 से ब्रिटेन में निवासरत थे और वर्ष 2013 में उन्होंन भारतीय नागरिता त्याग कर भारतीय नागरिकता ग्रहण कर ली थी। इसके बावजूद वर्ष 2017 तक आजमगढ़ के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल में आलिया सेक्शन के शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे और इस दौरान सरकारी वेतन लेते रहे। बाद में उन्हें पेंशन का भुगतान भी किया गया।
हालांकि, पिछले वर्ष अक्टूबर से पेंशन पर भी रोक लगा दी गई है। जांच में पता चला कि शमशुल हुदा खान ने मदरसा संचालन की आड़ में विदेश से धन एकत्र कर भारत भेजा, जिसके लिए संत कबीर नगर के कुल्लियातुर बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी और रजा फाउंडेशन जैसे एनजीओ का उपयोग किया गया। इस मामले चर्चा होने के बाद प्रशासन के स्तर पर निगरानी और कार्रवाई का दौर चल रहा है।
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