deltin33 Publish time Yesterday 11:57

कश्मीर विश्वविद्यालय के इस विभाग को ज्ञान भारतम क्लस्टर सेंटर का दर्जा, पांडुलिपियों के संरक्षण-डिजिटलीकरण की मिली जिम्मेदारी

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/KU-1768027955287.jpg

कश्मीर विश्वविद्यालय के फारसी विभाग को ज्ञान भारतम क्लस्टर सेंटर का दर्जा (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता, श्रीनगर। कश्मीर विश्वविद्यालय के फारसी विभाग को ज्ञान भारतम क्लस्टर सेंटर का दर्जा मिला है। यह दर्जा विभाग को पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रदान किया है। फारसी विभाग अब जम्मू-कश्मीर में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण, संरक्षण, संवर्धन, डिजिटलीकरण और शोध से जुड़े बड़े स्तर के प्रोजेक्ट्स को लागू करेगा।

इस पहल के अंतर्गत सरकारी, अर्ध-सरकारी, सार्वजनिक एवं निजी संग्रहों के साथ मंदिरों, खानकाहों, गुरुद्वारों, ट्रस्टों और व्यक्तिगत संग्रहों में सुरक्षित बहुमूल्य पांडुलिपियों को शामिल किया जाएगा।
\“शोध कार्यों में विश्वविद्यालय की भूमिका बढ़ेगी\“

कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निलोफर खान ने इसे विश्वविद्यालय की विरासत संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीकों से अमूल्य बौद्धिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में सहायक होगी और राष्ट्रीय सांस्कृतिक व शोध प्राथमिकताओं में विश्वविद्यालय की भूमिका को और सुदृढ़ करेगी।
70000 से 90000 पांडुलिपियां मौजूद

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 70000 से 90000 पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या को 2014 की बाढ़ के दौरान भारी क्षति पहुंची थी, जिससे क्षेत्र की दस्तावेजी विरासत का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। यह परियोजना ज्ञान भारतम कार्यक्रम (संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जाएगी।
अन्य क्षेत्रों में भी स्थापित होंगे उप-केंद्र

इसके तहत जम्मू और कश्मीर के अन्य क्षेत्रों में उप-केंद्र स्थापित किए जाएंगे। फारसी विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय पहले से ही नेशनल मिशन फार मैनुस्क्रिप्ट्स के अंतर्गत एक मैनुस्क्रिप्ट्स रिसोर्स सेंटर (MRC) का संचालन कर रहा है और यूजीसी, आईसीएचआर, आईसीएसएसआर तथा संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कई प्रमुख परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी कर चुका है।
MOU के तहत लागू होगी परियोजना

पांच वर्षों में यह पहल जम्मू-कश्मीर में दुर्लभ पांडुलिपियों और भारतीय साहित्यिक विरासत के पुनरुद्धार (Restoration), प्रलेखन (Documentation) और शोध (Research) में अहम भूमिका निभाएगी। यह परियोजना संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के ज्ञान भारतम कार्यक्रम और कश्मीर विश्वविद्यालय के फारसी विभाग के बीच पूर्व में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MOU) के तहत लागू की जाएगी।
Pages: [1]
View full version: कश्मीर विश्वविद्यालय के इस विभाग को ज्ञान भारतम क्लस्टर सेंटर का दर्जा, पांडुलिपियों के संरक्षण-डिजिटलीकरण की मिली जिम्मेदारी

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com