20 मौतों के बाद भी नहीं थमा ‘खूंखार’ हाथी का कहर, वंतारा की टीम के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/hathi-(1)-1768026769128.jpgझारखंड में हाथी का हमला
जागरण संवाददाता, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में आतंक का पर्याय बने खूंखार जंगली नर हाथी को काबू में करने के लिए वन विभाग का अभियान शनिवार को भी जारी रहा। एक सप्ताह में 20 लोगों की जान लेने वाला यह हाथी शुक्रवार देर शाम तक भी वन विभाग के नियंत्रण में नहीं आ सका।
हाथी की आक्रामकता को देखते हुए झारखंड–ओडिशा मुख्य सड़क को बंद रखा गया है, जबकि बेनीसागर, तिलोकुटी समेत आसपास के गांवों में एहतियातन लोगों को घर में ही रहने के लिए कहा गया है।
वंतारा की एक्सपर्ट टीम मौजूद
वन विभाग की टीम हाथी को ट्रेंकुलाइज करने के प्रयास में जुटी है। मौके पर झारखंड के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और गुजरात के वंतारा की एक्सपर्ट टीम मौजूद है। बावजूद इसके हाथी लगातार मूवमेंट बदल रहा है, जिससे ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं। जंगल क्षेत्र में जेसीबी मशीन की मदद से रास्ता बनाकर हाथी को सीमित दायरे में रखने की कोशिश की जा रही है।
शुक्रवार को हाथी के हमले में प्रकाश मालवा (40), चाला कुल्डी (22 ) की हाथी के हमले में मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। रात में ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
अब तक 20 लोगों की मौत
अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा जिले से आए हाथी पकड़ने वाले एक्सपर्ट सुखलाल बेहरा भी हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें बेहतर इलाज के लिए ओडिशा के ररुआं अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहां इलाज के क्रम में देर शाम उसकी भी मौत हो गई थी ।
हाथी के खतरे को देखते हुए मझगांव थाना पुलिस, अंचल अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं। भीड़ को घटनास्थल से दूर रखने के लिए लगातार अपील की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि शाम ढलने से पहले हाथी को काबू में करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसी और जानमाल की क्षति न हो।
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