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बिहार में अपराध अचानक क्यों घटा? डीजीपी के आंकड़ों ने खोले राज, हत्या-डकैती से लेकर साइबर और गन फैक्ट्री तक सख्त कार्रवाई

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डीजीपी विनय कुमार



जागरण संवाददाता, पटना। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले शासनकाल में बिहार में अपराध के ग्राफ में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने वर्ष 2025 के अपराध से जुड़े ऐसे आंकड़े पेश किए, जो न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि राज्य की पुलिसिंग व्यवस्था में आए बदलावों की भी तस्वीर दिखाते हैं। डीजीपी के मुताबिक वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में लगभग सभी संगीन अपराधों में कमी आई है और पहली बार डकैती की वार्षिक घटनाएं 200 से नीचे पहुंच गई हैं।


डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में हत्या की घटनाओं में 8.3 प्रतिशत, डकैती में 26.90 प्रतिशत, लूट में 21.10 प्रतिशत, दंगा में 21.50 प्रतिशत और बलात्कार के मामलों में 8.20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि बैंक डकैती में 80 प्रतिशत और बैंक लूट की घटनाओं में 62.50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। वर्ष 2024 में जहां जनवरी से दिसंबर के बीच डकैती की 238 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 174 रह गई।

डीजीपी ने कहा कि यह उपलब्धि बेहतर और सशक्त पुलिसिंग का परिणाम है।


अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस ने गिरफ्तारी के मोर्चे पर भी बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। डीजीपी के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में करीब 50 हजार अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी की गई।

इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल घटनाओं की संख्या ही नहीं घटी, बल्कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी पहले से ज्यादा सख्त हुई है।
वर्दी में अपराध पर ‘जीरो टॉलरेंस’

डीजीपी विनय कुमार ने पुलिसकर्मियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अपराध और अपराधियों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अगर कोई पुलिसकर्मी वर्दी में रहते हुए अपराध करेगा या अपराधियों की मदद करेगा, तो उसे भी तत्काल जेल भेजा जाएगा। हाल के दिनों में गयाजी, मोतिहारी, लालगंज (वैशाली) और छपरा में पुलिसकर्मियों से जुड़े मामलों पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी ने कहा कि दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा।


उन्होंने जमीन विवाद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। डीजीपी ने कहा कि जमीन विवाद में पुलिस की सीधी भूमिका नहीं होती, लेकिन जहां आपराधिक वारदात होती है, वहां कार्रवाई की जाती है।

सभी अंचलों में प्रत्येक शनिवार को जमीन विवाद सुलझाने के लिए विशेष बैठक होती है और इसकी पूरी कार्रवाई भू-समाधान पोर्टल पर अपलोड की जाती है।

इसके साथ ही भू-माफियाओं को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों को दिए गए हैं।
साइबर अपराध पर शिकंजा

साइबर अपराध को लेकर बिहार पुलिस की रणनीति और मजबूत की जा रही है। डीजीपी ने बताया कि फिलहाल साइबर थानों की संख्या नहीं बढ़ेगी, लेकिन उनमें तैनात मानव बल की संख्या बढ़ाई जाएगी।

साइबर अपराध के नियंत्रण के लिए एक अलग इकाई का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारी करेंगे। पटना में 6-7 मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा, जो साइबर अपराध नियंत्रण का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनेगा।

डीजीपी ने यह भी बताया कि बिहार पुलिस सिम बॉक्स मामले का खुलासा करने वाला देश का पहला राज्य है और आधार डाटा लीक करने वाले गिरोह को पूर्णिया से गिरफ्तार किया गया।
गन फैक्ट्री और हथियार नेटवर्क पर प्रहार

अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए हथियार और कारतूस सप्लाई चेन पर भी बड़ा हमला किया गया है। डीजीपी के अनुसार, वर्ष 2025 में 74 मिनी गन फैक्ट्रियों का खुलासा किया गया, जो 2024 की तुलना में कहीं अधिक है।

पूरे साल में 4,963 अवैध हथियार बरामद किए गए, जिनमें 54 रेगुलर आर्म्स शामिल हैं। इसके अलावा 30 हजार से अधिक कारतूस जब्त किए गए।

दूसरे राज्यों से जुड़े हथियार नेटवर्क के मामलों को एनआईए को सौंपा गया है, ताकि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
महिलाओं के खिलाफ अपराध में राहत

राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के 2023 के आंकड़ों का हवाला देते हुए डीजीपी ने बताया कि बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 37.50 है, जो राष्ट्रीय औसत 66.20 से काफी कम है।

राज्य के 855 थानों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना की जा चुकी है। स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा के लिए अभया ब्रिगेड का गठन किया गया है, जो जल्द ही सभी जिलों में सक्रिय होगी।
मद्य निषेध में बड़ी कार्रवाई

मद्य निषेध कानून के तहत 2025 में 1 लाख 25 हजार 456 लोगों की गिरफ्तारी की गई, जो 2024 की तुलना में करीब 3 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान लाखों लीटर देशी और विदेशी शराब जब्त की गई।


कुल मिलाकर डीजीपी द्वारा पेश किए गए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि बिहार में अपराध नियंत्रण के पीछे सख्त नीति, तकनीक का उपयोग, जवाबदेही और निरंतर कार्रवाई की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि राज्य में अपराध का ग्राफ लगातार नीचे आ रहा है।
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