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आधी जली लाश और वो गीली माचिस: संभल हत्याकांड की वो कहानी जो रोंगटे खड़े कर देगीा

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घटनाक्रम का खुलासा करती करते पुलि‍स अध‍िकारी



शिवकुमार कुशवाहा, जागरण, बहजोई। यह कहानी केवल एक हत्या की नहीं, बल्कि भरोसे के कत्ल, रिश्तों की टूटन और लालच की उस आग की है, जिसने इंसान को इंसान का दुश्मन बना दिया। हालात ऐसे बने कि प्यार, डर और भविष्य की उम्मीद एक खौफनाक साजिश में बदल गई और अगर माचिस गीली होने की एक छोटी सी चूक न होती, तो शायद यह अपराध की घटना जलकर राख हो गई होती।

हाथरस में रहने वाला सनी धीरे-धीरे अपने ही जीवन की गलतियों में फंसता चला गया। उसने अपना घर बेच दिया था, चोरी की वारदातें करना सीख ली थीं और इसी चलते हाथरस व मथुरा में जेल भी गया। घर बिकने के बाद न पैसे बचे, न स्थिर जीवन। शराब उसकी दिनचर्या बन चुकी थी और नशे में मारपीट आम बात हो गई थी। इन्हीं हालात से तंग आकर उसकी पत्नी नेहा गौतम मानसिक रूप से टूट चुकी थी।

वर्ष 2021 में हाथरस से सिकंदराराऊ के बीच आटो चलाने वाले संभल जिले के जुनावई के रंजीत से उसकी मुलाकात एक साधारण यात्रा के दौरान हुई। बातचीत बढ़ी, फोन नंबर बदले और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। उसी वर्ष नेहा रंजीत के साथ फरार हो गई और उसके गांव में रहने लगी, जिसे उसके मायके वालों ने भी स्वीकार कर लिया।

इसके बाद सनी ने नेहा के मायके वालों को लगातार परेशान करना शुरू कर दिया, यहां तक कि उसके भाई अरुण के साथ मारपीट भी की। इसी भय और दबाव से छुटकारा पाने की चाह ने हत्या की जमीन तैयार की। नेहा ने दोबारा पति से संपर्क शुरू किया, भरोसे में लेने के लिए कहा कि दिल्ली में नौकरी लगवा देगी, भाई वहीं काम करता है।

साजिश के तहत वह कासगंज के पटियाली पहुंची, जहां अपने ननिहाल और मायके के रास्ते पति को बुलाया गया। चार वर्ष पहले फरार होने के बाद भरोसा जीतने के लिए उसने शारीरिक संबंध बनाए और फिर पैसे देकर पति को भाई अरुण और प्रेमी रंजीत के साथ भेज दिया। अरुण को ई-रिक्शा खरीदवाने का लालच देकर साजिश में पूरी तरह शामिल किया गया।

शराब पिलाकर सनी को संभल जनपद के जुनावई क्षेत्र के जंगल में ले जाया गया और वहीं उसका गला घोंटकर हत्या कर दी गई। शव को भूसे की बोंगी में रखकर जलाने की योजना थी, लेकिन माचिस गीली निकल गई। दूसरी माचिस लेने गए तो दुकान बंद मिली। मजबूरी में हादसे का रूप देने की कोशिश की गई और शव जंगल में फेंक दिया गया। अगर वह माचिस जल जाती, तो शायद सबूत राख में बदल जाते और यह सच कभी सामने न आ पाता।




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