Chikheang Publish time Yesterday 17:27

छह साल बाद अवैध रूप से बने मजार मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित; एसडीएम कोर्ट में तीखी बहस

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जागरण संवाददाता, देवरिया। अवैध रूप से बने शहर के चर्चित मजार के मामले में छह साल बाद गुरुवार को नियत प्राधिकारी (एसडीएम सदर) श्रुति शर्मा की कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। करीब एक घंटे तक चली जोरदार बहस के बाद एसडीएम सदर ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

शहर के गोरखपुर रोड पर ओवरब्रिज से सटे मजार के मामले की सुनवाई सुबह करीब 11.30 बजे शुरू हुई। मजार पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिनेशनाथ त्रिपाठी ने अपने तर्क प्रस्तुत किए, जबकि विनियमित क्षेत्र की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) नवनीत मालवीय ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता भाजपा नेताओं की ओर से जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर मिश्र प्रीतम के साथ मंत्री जयप्रकाश मिश्र व मुकुंद माधव ने बहस में हिस्सा लिया।

मजार पक्ष की दलीलों का जिला शासकीय अधिवक्ता व अन्य अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध किया। बहस के दौरान स्थिति इतनी गर्म हो गई कि बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोर्ट कक्ष में एकत्र हो गए। करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद एसडीएम सदर ने फैसला सुरक्षित रख लिया। जल्द निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है।

यह मामला जलप्लावित एवं हरित क्षेत्र में बने मजार से जुड़ा है। वर्ष 2019 में भाजपा नेता नवीन सिंह, मारकंडेय तिवारी, अमरध्वज राय, धनुषधारी मणि, गोविंद चौरसिया, राजन यादव, अंबिकेश पांडेय और अभिजीत उपाध्याय आदि ने सरकारी भूमि पर अवैध मजार निर्माण की शिकायत की थी। तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर के निर्देश पर विनियमित क्षेत्र के जेई की ओर से आरबीओ एक्ट की धारा-10 के तहत वाद दाखिल किया गया था, लेकिन बाद में पत्रावली दबा दी गई।

जून 2025 में सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करते हुए कहा था कि अवैध मजार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि करीब 28 वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामनगीना यादव की हत्या मजार के वजूद पर सवाल उठाने के कारण की गई थी और वर्तमान में भी मजार पर संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं।

शिकायत के बाद एएसडीएम अवधेश निगम की कोर्ट ने वर्ष 1993 के कथित फर्जी परवाने पर मजार व कब्रिस्तान दर्ज किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके बाद भूमि को बंजर के रूप में दर्ज किया गया।
निर्देश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर ने लोक निर्माण विभाग और सेतु निगम को गोरखपुर रोड स्थित ओवरब्रिज के नीचे मजार के अवैध निर्माण को रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन न तो सेतु निगम और न ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई की।
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