LHC0088 Publish time 6 day(s) ago

FIR और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी नहीं रहने पर भागलपुर दंगा कांड में जेल में बंद प्रताप मंडल को मिली बड़ी राहत

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/09/article/image/Bhagalpur-riots-and-the-Logain-incident-1767953472283.jpg

प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर दंगे के सबसे बदनुमा दाग रहे लौगांय कांड में जेल में बंद आरोपित प्रताप मंडल की जमानत पर सुनवाई के दौरान एफआईआर और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी नहीं आने पर जमानत दे दी है। जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश-11 ज्योति कुमार कश्यप की अदालत ने केस से जुड़ी एफआईआर और आरोप पत्र की कार्बन उपलब्ध नहीं होने पर आरोपित की उम्र को देखते हुए जमानत पर मुक्त करने का आदेश दे दिया है। दंगा कांड में जेल में बंद एक आरोपित प्रताप मंडल की तरफ से जमानत की अर्जी पूर्व में दाखिल की गई थी। जिस पर न्यायालय ने पूर्व की सुनवाई में केस रिकार्ड की मांग की थी। केस रिकार्ड के उपलब्ध नहीं होने को लेकर न्यायालय को जानकारी दी गई कि पूर्व में उच्च न्यायालय पटना की मांग पर इस केस का रिकार्ड पटना उच्च न्यायालय भेजा गया था। वहां की क्वैरी में यह जानकारी सामने आई थी कि वहां सुनवाई बाद केस रिकार्ड भागलपुर व्यवहार न्यायालय भेज दिया गया था।
एफआईआर और आरोप पत्र की कार्बन कापी आने पर ही होनी थी सुनवाई

केस रिकार्ड के उपलब्ध नहीं होने पर न्यायालय को सरकार की तरफ से पटना से आए विशेष अपर लोक अभियोजक अतिउल्लाह ने तत्कालीन सप्तम एडीजे शंभू नाथ मिश्रा की अदालत में केस रिकार्ड वापस होने की संभावना जताई थी। न्यायाधीश ने कहा था कि जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए एफआईआर और आरोप पत्र का रहना जरूरी है। न्यायाधीश ने एसएसपी, भागलपुर को जगदीशपुर थानाकांड संख्या 164-89 और 2002-90 के एफआईआर और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। ताकि केस में जेल में बंद आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई हो सके। केस के रि-ओपन होने पर तत्कालीन डीआइजी ने दोनों केस की एफआईआर को एक कर उसका अनुसंधान कराया था। दोनों केस की एफआईआर और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी पुलिस के पास अन्य केसों के सुरक्षित कार्बन कॉपी की तरह मौजूद है। लेकिन न्यायालय के समक्ष उसे उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

[*]एसएसपी से मांगी गई थी 18 अगस्त 2025 की सुनवाई में एफआईआर और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी
[*]भागलपुर दंगे के लौगांय कांड में जेल में बंद आरोपित प्रताप मंडल की जमानत अर्जी पर
[*]सात जुलाई 2007 को इसी कांड के 14 अभियुक्तों को मिली थी उम्रकैद
[*]प्रताप तब आरोप गठन बाद हो गया था फरार
[*]न्यायालय ने एफएआईआर और आरोप पत्र की कॉपी नहीं मिलने पर आरोपित की उम्र को देखते हुए दी जमानत



सात जुलाई 2007 को एक दारोगा समेत 14 अभियुक्तों को मिली थी उम्रकैद

लौगांय कांड में सात जुलाई 2007 को तत्कालीन सप्तम एडीजे शंभूनाथ मिश्रा की अदालत में 14 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा मिली थी। जिनमें तत्कालीन जगदीशपुर थानाध्यक्ष रामचंद्र सिंह, लौगांय गांव के चौकीदार ठाकुर पासवान, प्रभात मंडल, रामदेव मंडल, अजब लाल मंडल, अर्जुन मंडल, सुखदेव मंडल, कुलदीप मंडल, सुभाष मंडल, यदु मंडल, नरेश मंडल, शिव लाल मंडल, जयप्रकाश मंडल और तब फरार चल रहे जयप्रकाश मंडल को शामिल थे। तब न्यायालय में ट्रायल के दौरान आरोप गठन के बाद ही आरोपित प्रताप मंडल भाग गया था। जिसकी काफी वर्षों बाद गिरफ्तारी हुई। प्रताप वर्ष 2024 से जेल में बंद था। उसकी तरफ से जमानत अर्जी दी गई थी। जिस पर सरकार के विशेष अपर लोक अभियोजक अतिउल्लाह की मौजूदगी में हुई बहस बाद जमानत अर्जी स्वीकृत कर ली गई।
दंगाइयों ने 116 लोगों की हत्या कर शव को तालाब में दफन कर लगा दी थी गोभी

24 अक्टूबर 1989 को भड़के भागलपुर सांप्रदायिक दंगा कांड के लौगांय कांड में दंगाइयों ने 116 लोगों की हत्या कर दी थी। तब दंगाइयों ने लौगांय गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवारों के घरों को घेर कर आग के हवाले कर दिया था। आग से बचने के लिए निकल कर भागने वाले बड़े, बूढ़े, बच्चे और महिलाओं का कत्ल दंगाइयों ने कर दिया था। उस दौरान कुछ लोग पास के तालाब में जान बचाने के लिए छलांग लगा दी थी। जिन्हें दंगाइयों ने मार डाला। फिर अन्य शवों को भी तालाब में ही दफन कर उसपर मिट्टी डाल ट्रैक्टर से जोत डाला था। उस जगह गोभी के पौधे लगा दिये गए थे।
Pages: [1]
View full version: FIR और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी नहीं रहने पर भागलपुर दंगा कांड में जेल में बंद प्रताप मंडल को मिली बड़ी राहत

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com