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दिल्ली में नियम-कानून को सड़कों पर बेखौफ रौंद रहे ई-रिक्शा, इंडिया गेट तक पहुंच; चार्जिंग से 150 करोड़ की बिजली चोरी

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बहादुर शाह जफर मार्ग से प्रतिबंध के बावजूद गुजरता ई-रिक्शा। जागरण



नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। \“\“लास्ट माइल कनेक्टिविटी\“\“ (अंतिम छोर तक पहुंच) के लिए ई-रिक्शा जहां दिल्ली में बेहतर और सुलभ साधन है, वहीं दूसरी ओर यह शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती भी बन चुके हैं।

दिल्ली की सड़कों पर वर्तमान में 2.5 लाख से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। समस्या की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उनमें से करीब एक से सवा लाख ई-रिक्शें अवैध रूप से बिना किसी पंजीकरण के चल रहे हैं।

दिल्ली परिवहन विभाग ने यातायात को सुचारू रखने तथा सुरक्षा के मद्देनजर 236 से अधिक सड़कों पर ई-रिक्शा के चलने और खड़े होने पर प्रतिबंध लगाया है। खासकर 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों पर उनके संचालन पर पाबंदी है, पर धड़ल्ले से ये राष्ट्रीय राजमार्गों तथा इंडिया गेट जैसे अति प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
दिल्ली में ई-रिक्शा हादसों में हर महीने जा रही तीन लोगों की जान

सुरक्षा को लेकर इस हद तक लापरवाही यात्रियों के जान पर बन आ रही है। दिल्ली में ई-रिक्शा हादसों में हर महीने औसतन तीन लोगों की जान जा रही है। पिछले वर्ष 2025 में नवंबर तक ई-रिक्शा संबंधित दुर्घटनाओं में 31 लोगों की जानें गई। जबकि, घायलों की संख्या 150 से अधिक रही है।

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चिंताजनक यह है कि कई मामलों में ई-रिक्शा को नाबालिग चालकों द्वारा चलाया जा रहा है। क्षमता से अधिक सवारियां को बिठाना, बीच सड़क पर रोक कर यात्री उतारना-चढ़ाना तथा गलत दिशा में चलाने की घटनाएं आम है।
दिल्ली में करीब 120 करोड़ की बिजली की चोरी

अधिकांश ई-रिक्शा का बीमा भी नहीं होता है। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा मिलना असंभव हो जाता है। उसमें भी कोढ़ में खाज की तरह \“\“जुगाड़\“\“ ई-रिक्शा हैं, जो साइकिल रिक्शा में मोटर लगाकर बनता है। उसकी बनावट खतरनाक होती है तथा गति मिलने पर उसके पलटने की घटना प्रमुखता से होती है। इतना ही नहीं, ये बिजली चोरी का भी बड़ा कारण बनते जा रहे हैं।

इनके चार्जिंग की व्यवस्था भी अवैध तरीके से चल रही है। अवैध रूप से झुग्गियों व अनियमित कॉलोनियों में बड़े-बड़े खतरनाक तरीके से बिना मानकों को अवैध चार्जिंग स्टेशन चल रहे हैं। पुरानी दिल्ली में आसफ अली मार्ग पर सड़क किनारे जैसे कई अन्य स्थानों पर खुलेआम अवैध चार्जिंग स्टेशन चल रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार, अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग से दिल्ली में करीब 120 करोड़ रुपये की बिजली की चोरी होती है।
प्रतिबंध के बावजूद चल रहे रिक्शें

पूसा रोड, करोलबाग, नेता जी सुभाष मार्ग, विकास मार्ग, नरवाना रोड, लुटियंस दिल्ली, कड़कड़डूमा कोर्ट, सूरजमल विहार, मास्टर प्लान रोड, कनाट प्लेस, इंडिया गेट, आउटर रिंग रोड, रिंग रोड, महावीर स्वामी मार्ग (रोहिणी), ओखला स्टेट मार्ग समेत दिल्ली की सभी प्रमुख सड़कें।
यातायात पुलिस व परिवहन विभाग की सख्ती नाकाफी

ऐसा नहीं है कि यातायात पुलिस व परिवहन विभाग ने चालान या ई-रिक्शा जब्त करने की कार्रवाई नहीं की। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष में सितंबर तक दिल्ली यातायात पुलिस ने ई-रिक्शा के मामले में चार लाख से अधिक चालान किए।

इसी तरह, पिछले वर्ष यातायात पुलिस तथा परिवहन विभाग द्वारा 2,200 से अधिक अवैध ई-रिक्शा जब्त किए गए, लेकिन समस्या यथावत है। ये यातायात जाम का प्रमुख कारण बन रहे हैं। स्थिति यह कि मेट्रो स्टेशनों, चौराहों, बस स्टापों और प्रमुख बाजारों में ई-रिक्शा के जमावड़े से पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों का निकलना दूभर हो गया है।
ई-रिक्शा नीति पर काम कर रही दिल्ली सरकार

दिल्ली की यातायात व्यवस्था की समस्या तथा वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बनते जा रहे ई-रिक्शा के परिचालन के मामले में दिल्ली सरकार नीति तय करने का काम कर रही है।

इसमें ई-रिक्शा बेचने वालों का पंजीयन, ई-रिक्शा का पंजीयन, व्यवसायिक चालक लाइसेंस की अनिवार्यता समेत अन्य नियमन हो सकते हैं। इसी तरह, उनके स्टैंड तथा चार्जिंग के लिए प्वाइंट का नियमन हो सकता है।
नोएडा-गाजियाबाद में प्रशासन सुस्त, ई-रिक्शा का मार्ग निर्धारित नहीं

ई-रिक्शा से यातायात जाम और दुर्घटनाओं से नोएडा, ग्रेटर व गाजियाबाद भी त्रस्त है, लेकिन प्रशासन सुस्त है। तीनों शहरों में ई-रिक्शा का रूट निर्धारित न होना चौंकाता है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 20 हजार से अधिक ई रिक्शा सड़कों पर घूम रहे है, जिस पर अंकुश लगाने में प्रशासन नाकाम है।

प्राधिकरण व यातायात पुलिस द्वारा मार्ग निर्धारित नहीं करने से उसके चालक जहां चाहते है, वहां ई- रिक्शा खड़ी कर देते हैं। उससे सुबह- शाम पीक आवर में ही नहीं, बल्कि दिनभर यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है। यह समस्या सीएनजी व ई-आटो को लेकर भी है।

हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डा. लोकेश एम ने कार्ययोजना बनाने की बात कही है। वैसे, गाजियाबाद में पुलिस ने शहर को तीन जोन में बांटकर उस आधार पर परिचालन के लिए ई-रिक्शा का रंग तय कर दिया है।
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