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अमेरिका के लिए समस्याएं पैदा करता है पाकिस्तान, भरोसे के लायक नहीं; थिंक टैंक की रिपोर्ट में बड़ा दावा

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न्यूयॉर्क आधारित थिंक टैंक गेटस्टोन इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में किया दावा (फोटो- रॉयटर)



आईएएनएस,वाशिंगटन। अमेरिका के साथ प्रमुख गैर नाटो सहयोगी (एनएनएनए) का दर्जा रखने के बावजूद पाकिस्तान एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार साबित नहीं हुआ है। न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक गेटस्टोन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान भरोसे के लायक नहीं है और इसे सबसे ज्यादा समस्याएं पैदा करनेवाले साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान के एमएनएनए दर्जे पर गंभीर पुनर्विचार की भी जरूरत बताई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का झुकाव लगातार अमेरिका के बजाय ईरान की ओर रहा है, जिससे वाशिंगटन के लिए उस पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है- खासकर गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि पाकिस्तान ने आज तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है, जबकि 1979 में इस्लामिक रिपब्लिक बनने के बाद ईरान को मान्यता देने वाला वह पहला देश था।

गेटस्टोन इंस्टीट्यूट के अनुसार, पाकिस्तान और ईरान अपने संबंधों को भाईचारे और साझा क्षेत्रीय हितों के रूप में प्रस्तुत करते हैं। दोनों देशों के बीच बलूचिस्तान को लेकर नीति-सामंजस्य भी है, जहां बलूच राजनीतिक गतिविधियों को वे अपनी क्षेत्रीय अखंडता और राज्य सत्ता के लिए खतरा मानते हैं।

नवंबर 2024 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉ‌र्प्स (आइआरजीसी) के तत्कालीन प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी और पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के बीच बैठक में बलूच अलगाववादी आंदोलनों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान-ईरान का यह तालमेल चीन के साथ साझा आर्थिक हितों से और मजबूत होता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी), चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ) का प्रमुख हिस्सा है, जिसमें ईरान भी एकीकरण का इच्छुक है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के ईरान के साथ खड़े होने का ताजा उदाहरण जून 2025 के 12-दिवसीय युद्ध के दौरान देखने को मिला, जब ईरान और इजरायल-अमेरिका गठबंधन के बीच सीधे सैन्य संघर्ष में इस्लामाबाद ने खुलकर तेहरान का समर्थन किया। युद्ध के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेशेजेकियान ने अगस्त 2025 में पाकिस्तान की यात्रा की, जिसे दोनों देशों ने बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के कुछ ही हफ्तों बाद पाकिस्तान का तेहरान के साथ इस तरह घनिष्ठता बढ़ाना यह दर्शाता है कि वह लगातार वाशिंगटन के साथ अपनी रणनीतिक प्रतिबद्धताओं से अधिक क्षेत्रीय और वैचारिक संबंधों को प्राथमिकता देता रहा है।
ग्रीनलैंड पर अमेरिका से वार्ता को जरूरी मान रहा डेनमार्क

डेनमार्क ने अगले सप्ताह अमेरिका के साथ होने वाली बैठक का स्वागत किया है और कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर वार्ता बहुत आवश्यक है। इस बैठक में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर चर्चा की जाएगी।

ट्रंप ने हाल ही में यह मांग दोहराई थी कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड की जरूरत है। जबकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति सैन्य उपयोग और ग्रीनलैंड कोखरीदने समेत विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं।

डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रायल्स पाल्सन ने गुरुवार को स्थानीय मीडिया से कहा, \“यह संवाद आवश्यक है, जिसके लिए सरकार ने ग्रीनलैंड सरकार के साथ मिलकर अनुरोध किया है।\“ जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को बताया था कि ग्रीनलैंड को लेकर अगले सप्ताह एक बैठक होगी। हालांकि उन्होंने के स्थान, समय और प्रतिभागियों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया था।
अमेरिका से सीधे बातचीत करे ग्रीनलैंड: विपक्षी नेता

रॉयटर के अनुसार, ग्रीनलैंड के विपक्षी नेता पेले ब्रोबर्ग ने सरकार से आग्रह किया है कि उसे डेनमार्क के बिना अमेरिका के साथ सीधे बातचीत करनी चाहिए। बता दें कि डेनमार्क के नियंत्रण वाला ग्रीनलैंड यूरोप और उत्तरी अमेरिका के मध्य स्थित है। इसकी आबादी महज 57 हजार है। ब्रोबर्ग की नालेराक इस द्वीप की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, जो ग्रीनलैंड की स्वतंत्रता की वकालत करती है।
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