deltin33 Publish time 7 day(s) ago

दून की 90 साल पुरानी ऐतिहासिक बिल्डिंग को किया जा रहा ध्वस्त, दिल्ली के कनाट प्लेस से प्रेरित था इसका डिजाइन

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/08/article/image/Mansa-Ram-Bank-1767893920347.jpg

राजपुर रोड-घंटाघर क्षेत्र की पहचान रही मंसा राम बैंक की इमारत इतिहास बन के पन्नों में रह जाएगी।



जागरण संवाददाता, देहरादून: राजपुर रोड-घंटाघर क्षेत्र की पहचान रही ऐतिहासिक मंसा राम बैंक की इमारत अब इतिहास बन के पन्नों में रह जाएगी। तकरीबन 90 वर्ष पुरानी इस बहुमंजिला इमारत को हाईकोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

मशीनों की आवाज के साथ ही देहरादून के शहरी विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। इमारत भले ही जमीन से मिट जाए, लेकिन शहर के इतिहास और स्मृतियों में इसकी मौजूदगी हमेशा बनी रहेगी।

राजपुर रोड पर जिस स्थान से शहर के आधुनिक बाजार की नींव मानी जाती थी, वहीं अब मलबे का ढेर दिखाई देने लगा है। कहा जाता है कि देश की आजादी के कालखंड में राजपुर रोड की शुरुआत इसी इमारत से मानी जाती थी। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि उस दौर की पहचान थी जब दून एक शांत, सीमित और योजनाबद्ध शहर हुआ करता था।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/01/08/template/image/Mansa-Ram-Bank-News-1767894099272.jpg

करीब 90 साल पुरानी यह इमारत समय के साथ पूरी तरह जर्जर हो चुकी थी। दीवारों में दरारें, सीलन और कमजोर संरचना के कारण इसे भूकंप के लिहाज से भी असुरक्षित माना जाने लगा था। सुरक्षा को देखते हुए न्यायालय के निर्देश पर इसके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई।
शहर का प्रतिष्ठित बाजारों में से एक है राजपुर रोड- घंटाघर क्षेत्र

राजपुर रोड-घंटाघर क्षेत्र शहर का सबसे प्रतिष्ठित बाजार माना जाता है। ज्वेलरी, कपड़े, फोटो स्टूडियो और ट्रैवल एजेंसियों से यह इलाका दिनभर गुलजार रहता है। उस दौर में भी इमारत की ऊपरी मंजिलों में दफ्तरों के साथ कुछ परिवारों के आवास भी थे।

लोहे की ग्रिल वाली बालकनियों से घंटाघर, परेड ग्राउंड और राजपुर रोड का नजारा साफ दिखाई देता था। कई बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने यहीं से शहर के जुलूस, परेड और कई अहम ऐतिहासिक क्षण देखे हैं। पुरानी तस्वीरों में यह इमारत देहरादून की स्काईलाइन का अहम हिस्सा नजर आती है।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/01/08/template/image/Doon-Mansa-Ram-Bank-1767894225678.jpg

समय बदला, शहर का विस्तार हुआ और नए बाजार उभरते चले गए। दुकानदार यहां से चले गए, ऊपरी मंजिलें खाली रहने लगीं और रखरखाव पर खर्च कम होता गया। कर्ज की पूरी राशि न चुकाने के कारण इस संपत्ति को पहले भारत इंश्योरेंस और बाद में उसके एलआइसी में विलय के बाद उसके अधीन चली गई।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/01/08/template/image/Mansa-Ram-Bank-Dun-1767894200216.jpg
1930 में शुरू हुआ था बिल्डिंग का निर्माण

मंसा राम बिल्डिंग का निर्माण 1930 से 1940 के दशक के बीच व्यापारी सेठ मंसा राम ने कराया था। उस दौर में जब दून में अधिकांश मकान एक या दो मंजिला होते थे, तब तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत बनवाना उनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

निर्माण के लिए सेठ मंसा राम ने भारत इंश्योरेंस कंपनी से 1.25 लाख रुपये कर्ज लिया था, जो उस समय बेहद बड़ी राशि थी और आज के हिसाब में करोड़ों रुपये के बराबर मानी जाती है। इस इमारत का डिजाइन दिल्ली के कनाट प्लेस से प्रेरित था। चौड़ी गैलरियां, एक कतार में सजी दुकानें, ऊपर कुछ दफ्तर और आवास, यह सब उस समय देहरादून के लिए बिल्कुल नया था।

इसी कारण लोग इसे ‘दून का छोटा कनाट प्लेस’ भी कहने लगे। गत कई वर्षों से इसे गिराने, पुनर्विकास करने या हेरिटेज भवन के रूप में संरक्षित करने को लेकर बहस चलती रही, लेकिन इसे आधिकारिक हेरिटेज दर्जा नहीं मिल सका। अंततः जर्जर हालत और जनसुरक्षा को देखते हुए इसे तोड़ने का निर्णय लिया गया।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड के इस टूरिस्ट डेस्टिनेशन को कहते हैं \“छिपा हुआ हीरा\“, जहां सूर्योदय-सूर्यास्त बनाते हैं स्वर्ग जैसा नजारा

यह भी पढ़ें- Uttarakhand: अनछुआ पर्यटन स्थल देववन, चकराता में पर्यटकों को दे रहा है अलग अनुभव
Pages: [1]
View full version: दून की 90 साल पुरानी ऐतिहासिक बिल्डिंग को किया जा रहा ध्वस्त, दिल्ली के कनाट प्लेस से प्रेरित था इसका डिजाइन

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com