Chikheang Publish time 2026-1-8 21:26:36

सात साल में 1927 सैंपल फेल, गाजियाबाद में हर चौथा पानी का नमूना दूषित; 50 लाख की आबादी पर मंडरा रहा खतरा

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मोदीनगर देवेन्द्रपुरी में पानी का सैंपल लेता स्वास्थ्यकर्मी। सौ. स्वास्थ्य विभाग



मदन पांचाल, जागरण गाजियाबाद। पानी की जांच करने की जिम्मेदारी तो तय है पर अधिकारी खानापूरी को भी मैदान में नहीं उतरते हैं। 50 लाख की आबादी वाले जिले में पानी की रासायनिक जांच को कोई सरकारी लैब नहीं है। इस प्रकार की जांच की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग की है। पानी की गुणवत्ता परखने को यह जांच अनिवार्य है।

बता दें कि बायोलाॅजिकल जांच की लैब है। टीम को हर माह शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में जांच करनी होती है लेकिन सिर्फ जहां कहीं शिकायत आती है वहीं जांच करने पहुंचती हैं। बीते एक साल में दूषित पानी के दो हजार सैंपल लिए गए। इसमें 90 प्रतिशत सैंपल शिकायतों पर ही आधारित हैं। इसमें 40 प्रतिशत नमूने फेल पाए गए थे।

स्वास्थ्य विभाग बायोलाजिकल जांच को लगातार नगर निगम के साथ मिलकर पानी के सैंपल लेकर जांच को एमएमजी अस्पताल परिसर स्थित जिला पब्लिक हेल्थ लैब में भेजता है। माइक्रोबायोलाॅजिस्ट डाॅ. सुरूचि सैनी द्वारा पानी की जांच इनक्यूबेटर से एचटूएस विधि से की जाती है। जांच रिपोर्ट 72 घंटे में आती है।

इसमें यह पता चलता है कि पीने वाले पानी में सीवरेज का गंदा पानी मिला है अथवा नहीं। यह जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा जलजनित रोगों की रोकथाम के लिये की जाती है। संयुक्त अस्पताल में अतिरिक्त इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब का निर्माण कार्य चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात साल में लिए गए सात हजार पानी के नमूनों के सापेक्ष 1927 नमूने जांच में फेल पाये गये हैं।
मलिन बस्ती से लेकर पाश इलाकों तक एक हाल

रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात साल में लिए गए पानी के 7160 नमूनों के सापेक्ष 1927 पानी के नमूने जांच में फेल पाए गए।5233 नमूने जांच में सही पाए गए।सबसे अधिक पानी के नमूने 2025 में जांच में फेल पाए गए हैं। इनमें मलिन बस्तियों से लेकर राजनगर एक्सटेंशन की कई सोसायटियों का पानी भी जांच में फेल पाया गया है। साया और केडब्ल्यू सृष्टि में गंदे पानी की सप्लाई से सैकड़ों लोग बीमार पड़ चुके हैं। इन दिनों ओपीडी में भी दूषित पानी पीने से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
इन इलाकों में जांच में पानी की गुणवत्ता मिली खराब

पंचशील वेलिंग्टन बुलंद हाइट्स क्रासिंग रिपब्लिक, लैंड क्राफ्ट मेट्रो होम्स बसंतपुर सैथली, नीलपदम कुंज सेक्टर-1 वैशाली, रूपाली कन्फेक्शनरी साहिबाबाद, अर्पित वाटर प्लांट साहिबाबाद, केडब्ल्यू सृष्टि, क्लाउड नाइन वैशाली, गार्डेनिया गीतांजलि सोसायटी वसुंधरा, आम्रपाली एम्पायर सोसायटी, लोटस सृष्टि सोसायटी, भारत सिटी सोसायटी, फॉर्च्यून रेजीडेंसी, गौड़ सिद्धार्थम सोसायटी, एपेक्स क्राइमलाइन
सात वर्षों में पानी की जांच की स्थिति



   वर्ष
   सैंपल
   फेल


   
2019
   
436
   
128


   2020
   212
   64


   2021
   394
   114


   2022
   1045
   302


   2023
   1158
   269


   2024
   1912
   511


   2025
   2003
   539





“स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को लेकर मीडिया में खबर प्रकाशित होने अथवा लिखित शिकायत के आधार पर जांच को पानी के सैंपल लिये जाते हैं। जिला पब्लिक हेल्थ लैब में केवल बायोलाजिकल जांच की जाती है। रासायनिक जांच की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग की है। जिले में पानी की रासायनिक जांच के लिये कोई सरकारी लैब नहीं है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सोसायटी एवं व्यक्ति को नोटिस जारी करके स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के सख्त निर्देश दिये जाते हैं। नगर निकायों को भी पत्र भेजा जाता है। 2025 में कुल लिए गए 2003 में से 539 पानी के नमूने जांच में फेल पाए गए है। संबंधित को नोटिस जारी कर स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं।“

-डॉ. आरके गुप्ता, जिला सर्विलांस अधिकारी

“दूषित पानी पीने से जलजनित और संक्रामक रोग फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इससे टाइफाइड और डायरिया होता है। शुरुआत में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और जी मिचलाना होता है। हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा बढ़ जाता है। पिछले एक साल में टाइफाइड के दो सौ से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।“

-डाॅ. आलोक रंजन, फिजीशियन जिला एमएमजी अस्पताल


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