मनरेगा योजना खत्म करने के विरोध में पंजाब कांग्रेस का संग्राम शुरू, केंद्र सरकार पर गरीबों को धोखा देने का आरोप
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/08/article/image/10-1767858136987.jpegगुरदासपुर में रैली में पहुंचे भूपेश बघेल, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और प्रताप सिंह बाजवा।
जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। मनरेगा योजना को बंद कर नई योजना लागू किए जाने के विरोध में पंजाब कांग्रेस ने राज्यस्तरीय संघर्ष की शुरुआत कर दी है। कांग्रेस ने अपने इस ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का आगाज गुरदासपुर से किया, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पहला बड़ा कार्यक्रम किया। इस आंदोलन की शुरुआत खास तौर पर माझा क्षेत्र से की गई है।
पार्टी का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार मिलकर गरीब और मजदूर वर्ग की जीवनरेखा मानी जाने वाली मनरेगा योजना को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। इस मौके पर पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य सरकारों पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के जरिये मजदूरों के साथ खुला धोखा किया जा रहा है। बघेल ने घोषणा की कि यह मनरेगा बचाओ संग्राम अब करीब पांच दिनों तक चलेगा और पंजाब के विभिन्न जिलों में सभाएं आयोजित की जाएंगी। उनके अनुसार कांग्रेस इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुद्दा उठा चुकी है और अब यह लड़ाई जनता के बीच जाकर लड़ी जाएगी।
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बूपेश बघेल व राजा वडिंग अमृतसर से गुरदासपुर के लिए रवाना हुए।
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वडिंग ने राज्य सरकार को घेरा
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में मनरेगा योजना को सरकार ने लगभग मौत के मुंह में धकेल दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि मनरेगा कांग्रेस सरकार के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व में शुरू की गई थी ताकि गरीब परिवारों को घर के पास रोजगार की गारंटी मिल सके।
वडिंग ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने फंड में भारी कटौती की है, जबकि राज्य सरकार अपने हिस्से का योगदान ही नहीं दे रही, जिससे योजना पूरी तरह ठप हो गई है।
राज्य के खजाने पर पड़ेगा 40 फीसदी का बोझ
वडिंग ने यह भी कहा कि पहले केंद्र 90 प्रतिशत और राज्य 10 प्रतिशत फंड देता था, लेकिन नई व्यवस्था में राज्य पर 40 प्रतिशत तक का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है, जो पंजाब की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए संभालना संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने बायोमेट्रिक हाजिरी और मोबाइल ऐप सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे बुजुर्ग मजदूरों को भारी दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि कई बार वे अंगूठा लगाने में भी सक्षम नहीं होते।
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