Gupt Navratri 2025: कब से शुरू हो रहे हैं माघ माह के गुप्त नवरात्र, यहां पढ़ें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/08/article/image/magh-Gupt-Navratri-2026-1767849848632.jpgगुप्त नवरात्र तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष फलदायी है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माना गया है कि गुप्त नवरात्र (Magh Gupt Navratri Date) के दौरान माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना से साधक के घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही उसे आरोग्य का आशीर्वाद भी मिलता है। यह नवरात्र तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है।
इस दिन से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र
माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी को देर रात 1 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 20 जनवरी को देर रात 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 19 जनवरी से होगी, जो 28 जनवरी तक चलने वाले हैं। गुप्त नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा -
[*]घटस्थापना मुहूर्त - सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक
[*]घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक
(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
गुप्त नवरात्र का महत्व
माघ और आषाढ़ माह में पड़ने वाले नवरात्र को गुप्त नवरात्र के रूप में जाना जाता है। इस दौरान प्रकट नवरात्र की तरह ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक, मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना गया है कि गुप्त नवरात्र की अवधि में मां दुर्गा 10 महाविद्याओं के रूप में प्रकट हुई थीं। इसलिए इन दौरान दस महाविद्याओं की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। गुप्त नवरात्र की पूजा मुख्य रूप से अघोरी व तांत्रिकों द्वारा की जाती है। माना जाता है कि इस पूजा को जितने गुप्त रूप से किया जाए, साधक को उतना अधिक लाभ मिलता है।
https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/01/08/template/image/Mahavidyas-i-1767849948709.jpg
(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
गुप्त नवरात्र पूजा विधि
[*]गुप्त नवरात्र के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
[*]पूजा स्थल की सफाई करने के बाद देवी दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
[*]शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना करें।
[*]माता रानी को सिंदूर व गुड़हल के फूलों की माला अर्पित करें।
[*]देवी को पंचामृत और नारियल आदि अर्पित करें और देसी घी का दीपक जलाएं।
[*]अंत में देवी मां की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बाटें।
यह भी पढ़ें - Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर करें भगवान शिव की खास पूजा, नहीं परेशान करेंगे शत्रु
यह भी पढ़ें - Vastu Tips: आपके घर को बुरी नजर से बचाएंगे ये 6 वास्तु उपाय, नकारात्मक ऊर्जा का होगा अंत
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
Pages:
[1]