यूपी में थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस सत्यापन के लिए फरवरी से चलेगा अभियान, एफएसडीए आयुक्त ने दिए निर्देश
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/08/article/image/Medicine-1767841156511.jpgराज्य ब्यूरो, लखनऊ। कोडीन युक्त कफ सीरप और नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए चल रहे अभियान के बाद अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस व गोदामों का सत्यापन करेगा।
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सभी सहायक आयुक्त और औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वह फरवरी से सभी थोक दवा की दुकानों का सत्यापन करें। इसमें लाइसेंसी फर्म की स्वीकृत चौहद्दी में स्थिति, दवाओं के भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था, प्रतिष्ठान पर उपयुक्त व्यक्ति की उपस्थिति और उनके अनुभव प्रमाण पत्र की पुष्टि की जांच जाए।
आयुक्त के अनुसार, दो माह तक चले अभियान में पता चला है कि कई थोक दवा फर्में पंजीकृत पते पर नहीं हैं।लाइसेंस लेने के बावजूद उनका संचालन ही नहीं किया गया। कई फर्मों के पंजीकृत पते पर सिर्फ भवन स्वामी ही मिले, जिन्हें दवा के लाइसेंस के बारे में जानकारी ही नहीं थी।
इसी को देखते हुए सभी थोक लाइसेंस का सत्यापन कराया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि दवा दुकान के अलावा किसी और स्थान पर गोदाम है तो, उसका अलग से लाइसेंस लिया गया कि नहीं। इसके अलावा, सत्यापन अभियान शुरू होने से पहले थोक दवा विक्रेताओं को लाइसेंस वापस करने का मौका भी दिया जाएगा।
सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह ये व्यवस्था करें कि जिस स्थान पर दवा की दुकान या गोदाम है, उसका भवन स्वामी अपने स्तर से यह पुष्टि करे कि किराएदार वैध लाइसेंस व्यवसाय कर रहा है। रोशन जैकब ने कड़ाई से सत्यापन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि प्रदेश में लगभग 80 हजार थोक विक्रेताओं के लाइसेंस हैं। कोडीन युक्त सीरप की अवैध बिक्री के खिलाफ चले अभियान में थोक दवा फर्मों में कई गड़बड़ियां मिली थी। इसी के बाद लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में नए दिशा-निर्देश एफएसडीए ने जारी किए हैं। इसके साथ ही पुराने लाइसेंस का सत्यापन भी कराया जाएगा।
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