deltin33 Publish time 2026-1-8 01:56:34

देश की 12 प्रमुख भाषाओं के सिनेमा को एक मंच पर लाएगा इंडियन नेशनल सिने एकेडमी, इस दिन होगा भव्य कार्यक्रम

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देश की 12 प्रमुख भाषाओं के सिनेमा को एक मंच पर लाएगा इंडियन नेशनल सिने एकेडमी



एंटरटेनमेंट ब्यूरो, मुंबई। हिंदी के साथ-साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, ओडिया, मराठी, गुजराती, बांग्ला और पंजाबी समेत देश की प्रमुख भाषाओं के सिनेमा को एक मंच पर साथ लाने के उद्देश्य से बुधवार की रात मुंबई में इंडियन नेशनल सिनेमा एकेडमी (आइएनसीए) की घोषणा हुई। जिसकी स्थापना निर्माता विष्णुवर्धन इंदुरी ने की है।

इसके तहत देश की प्रमुख बारह भाषाओं की फिल्म इंडस्ट्री के वार्षिक कॉन्क्लेव, अवार्ड समारोह का आयोजन तथा कलाकारों, टेक्नीशियनों और क्रिएटिव व्यक्तियों का डाटाबेस एक जगह एकत्र किया जाएगा।

संस्था द्वारा आयोजित आइएनसीए अवा‌र्ड्स के पहले संस्करण की घोषणा नौ मार्च को मुंबई में की जाएगी। जिसमें सभी भाषाओं की फिल्मों में से सर्वश्रेष्ठ फिल्मों और टेक्नीशियनों को अवार्ड दिए जाएंगे।

इस दौरान समारोह में हिंदी और अन्य क्षेत्रीय सिनेमाओं की प्रतिनिधित्व करते हुए रोहित शेट्टी, आनंद एल राय, मनोज तिवारी, प्रोसेनजीत चट्टोपाध्याय, दिल राजू, खुशबू सुंदर, लक्ष्मी मंचू और शिबाशीष सरकार समेत सिनेमा जगत से जुड़ी कई हस्तियां उपस्थित रहीं।

इस दौरान विष्णु वर्धन ने बताया कि विश्वसनीयता को बनाए रखने लिए इस अवार्ड शो में कोई परफार्मेंस नहीं होंगे, ना ही इसे किसी टीवी चैनल पर प्रसारित किया जाएगा। स्टेज पर सिर्फ विजेता और मेजबान बातचीत करेंगे। सामान्यत: अवार्ड समारोह में परफार्म करने की शर्तों पर अवा‌र्ड्स के साथ समझौता किया जाता है।
सभी साथ आएं : रोहित शेट्टी

वहीं इस मौके पर रोहित शेट्टी ने कहा कि हमारे यहां एक राष्ट्र, एक जश्न और एक सिनेमा होना चाहिए, वह है भारतीय सिनेमा। सिनेमा के लिए सबसे दुखद चीज लोगों का फुटफाल है। 140 करोड़ लोगों की हमारी आबादी में अगर कोई फिल्म ब्लाकबस्टर या सबसे बड़ी हिट होती है, उसके भी फुटफाल गिनने पर तीन चार करोड़ ही होते हैं। यानी सिर्फ तीन-चार करोड़ लोग ही सिनेमाघरों में फिल्म देखते हैं, इसके पीछे कारण हैं भाषाई बंदिशे।



आगे रोहित ने कहा कि बॉलीवुड, टॉलीवुड जैसे शब्दों की शुरुआत जब हुई थी, तो इन्हें मजाक के तौर पर कहा जाता था। बॉलीवुड नाम से बुलाया जाना हमारे लिए कभी गर्व की बात नहीं रही है। हम हिंदी सिनेमा, भारतीय सिनेमा या तेलुगु सिनेमा हैं। अब समय की सबसे बड़ी मांग है कि हम सभी एक साथ आएं और भारतीय सिनेमा को गर्व महसूस करवाएं।
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