गाजियाबाद में पेयजल उपलब्ध कराने में नाकाम हो रहीं बूढ़ी हो चुकी पाइपलाइन, गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो रहे शहरवासी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/08/article/image/Contaminated-water-1767811742090.jpgजागरण संवाददाता, गाजियाबाद। नगर निगम क्षेत्र की कुछ कॉलोनियों में पेयजल और सीवर पाइपलाइन 30-35 वर्ष पुरानी हो चुकी है। आए दिन पाइपलाइन में लीकेज होने से लोगों के घरों में दूषित पानी की आपूर्ति आम बात हो गई है। कई जगह सीवर और पेयजल लाइन एक साथ होकर गुजर रही हैं।
लीकेज होने से घरों में सीवर के पानी की आपूर्ति हो जाती है। वहीं, अमृत योजना के तहत भी लोगों को पानी का लाभ नहीं मिला है। शहर से लेकर गांव तक कई योजनाओं का काम अधूरा है। खोड़ा में तो कागजों में ही काम चल रहा है। प्रस्तुत है जागरण टीम की रिपोर्ट...
गाजियाबाद के कई क्षेत्र में पेयजल लाइन 30-40 वर्ष पुरानी
गाजियाबाद के कैला भट्टा, जस्सीपुरा, इस्लाम नगर, हबीब कालोनी, प्रेम नगर, लुहारपुरा, दौलतपुरा आदि कालोनी में पेयजल लाइन 30-40 वर्ष पुरानी है। लोहे की लाइन में जंग लग चुका है। आए दिन जर्जर लाइन फट जाती है। कई जगह से पानी की लाइन नाले से होकर गुजर रही है।
पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने पर नाले का पानी उस लाइन में चला जाता है। इससे लोगों को गंदे पानी की आपूर्ति होती है। इसके चलते कुछ लोग बोतलबंद पानी खरीदते हैं, जबकि कुछ लोग अनजाने में दूषित जल का प्रयोग करते हैं, जिससे बीमारी फैल रही है। लोगों को त्वचा और हेपेटाइटिस और पेट संबंधी बीमारी हो रही हैं।
ट्रांस हिंडन में दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें हैं अधिक
इंदिरापुरम को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने 1990 के बाद विकसित किया था। उस दौरान की पेयजल पाइपलाइन डाली गई थी। इसके अलावा अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल पाइपलाइन के साथ ही सीवर की लाइन भी डली हुई है, जो सेहत के लिए बड़ा खतरा है। दोनों के क्षतिग्रस्त होने के कारण सीवर लाइन से आने वाला दूषित पानी पाइप लाइन में जाता है।
साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में सड़क किनारे पाइपलाइन में लीकेज के चलते सड़क पर पानी भरा नजर आया। इसके ठीक सामने पड़ी लोहे की पाइपलाइन भी काफी जर्जर हालत में दिखी। ब्रज विहार में नाला दूषित पेयजल का सबसे बड़ा कारण है। यहां पेयजल की लाइन नाले में होकर जा रही है।
दैनिक जागरण की टीम ने जब इस क्षेत्र में पड़ताल की तो नाले में पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था। राजेंद्र नगर सेक्टर पांच, राधेश्याम पार्क, शालीमार गार्डन में गणेशपुरी क्षेत्र, शहीद नगर, जवाहर पार्क, डिफेंस कालोनी, तुलसी निकेतन, भोपुरा, बनी नहीं या जर्जर हो चुकी है। वसुंधरा सेक्टर 13, 16, 17, 15, 18, 19, वैशाली और कौशांबी के कुछ हिस्सों में 25 से 30 वर्ष से अधिक पुरानी पेयजल लाइन है। यहां भी पेयजल लाइन लीकेज होती रहती है।
दो वर्षों से कागजों में चल रही खोड़ा की अमृत 2.0 योजना
खोड़ा को मिलने वाले शोधित गंगाजल की अमृत 2.0 योजना दो वर्ष से कागजों में ही चल रही है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा की कोशिश से इस योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव बनाया गया था। खोड़ा में गंगाजल की आपूर्ति की 183 करोड़ की योजना स्वीकृत हुई थी।
27 सितंबर 2024 को योजना के लिए धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसके तहत खोड़ा को 50 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति होनी थी। यह जल नोएडा प्राधिकरण से लिया जाना था।
जल निगम द्वारा योजना के लिए तकनीकी निविदा कर दी गई थी, लेकिन अब तक नोएडा प्राधिकरण से विभाग को लिखित सहमति नहीं मिली है। इस कारण से फाइनेंशियल बिड नहीं खोली जा सकी है, जिससे परियोजना प्रारंभ नहीं हो सकी है। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने सीएम योगी को पत्र लिखकर नोएडा प्राधिकरण को जल देने के लिए आदेशित करने की मांग की है।
140 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का काम अधूरा
मोहन नगर जोन की कालोनियों में नमामि गंगे योजना के तहत जल निगम द्वारा 330 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत सीवर लाइन बिछाने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का काम किया जा रहा है। परियोजना का काम एक अप्रैल 2024 को शुरू हुआ था। जल निगम ने दिसंबर 2025 तक काम पूरा करने दावा किया था।
जल निगम का दावा है कि 145 किलोमीटर लाइन बिछाई जाएगी। सीवर लाइन से मोहन नगर जोन के 68 हजार घरों को जोड़ा जाएगा। एसटीपी सहित मैन पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) और पांच इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आइपीएस) बनाए जाएंगे। लोगों का आरोप है कि काम धीमी गति से चल रहा है, जिस वजह से हरनंदी को साफ करने का इंतजार बढ़ता जा रहा है।
108 गांवों में जल जीवन मिशन योजना के तहत पेयजल योजना ठप
जल जीवन मिशन योजना के तहत जल निगम को नवंबर 2024 से बजट नहीं मिला है। इस कारण योजना का काम ठप हो गया है। जिले में 148 गांवों में योजना का काम पूरा होना था। जिले के 108 गांवों में काम अटका हुआ है। अब इस योजना की डेडलाइन मार्च 2025 तय की गई थी। गांवों में 50 किलो लीटर से 500 किलो लीटर क्षमता की टंकी बनाई जा रही हैं।
यह योजना वर्ष 2019 में शुरू हुई थी, लेकिन गाजियाबाद में यह योजना 2021 में शुरू हुई। डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में इस योजना के तहत 311 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित हुआ था। अभी तक 74 गांवों की टंकी बनवाने के बाद उनमें पेयजल लाइन बिछाई का काम पूरा हुआ है, लेकिन इन गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
मुरादनगर में दो टंकी बनाई गईं, पानी एक बूंद नहीं मिला
तीन लाख की आबादी वाले मुरादनगर में ज्यादातर पाइपलाइन 15 वर्ष से अधिक पुरानी है। अमृत योजना के तहत हाल के वर्षों में नगर में 11 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन बिछाई गई हैं। इसके अलावा क्षेत्र के गावों को भी पेयजल की सुविधा से जोड़ा गया है, लेकिन काम के दौरान डाले गए पाइप की गुणवत्ता को लेकर लोगों ने कई बार शिकायत की थी। सात वर्ष पहले सहबिस्वा में जल निगम ने दो टंकियां बनाई थी, लेकिन इनका प्रयोग नहीं किया गया। लोग कई बार इन टंकियों को चालू कराने की मांग कर चुके हैं।
ब्रज विहार में दूषित पेयजल की समस्या पाइपलाइन पुरानी होने की वजह से है। 20 साल पुरानी पेयजल पाइपलाइन है, इनमें से अधिकांश लाइन गल चुकी है और दूषित पानी घरों में आता है।
- आदित्य भारद्वाज, ब्रज विहार
सबसे अधिक परेशानी घरों में दूषित पानी आने की है। दोनों समय घरों में बदबूदार पानी की आपूर्ति होती है। इससे लोगों की सेहत को भी खतरा है। लोग खरीदकर पानी पीने के लिए मजबूर हैं। सीवर और पेयजल पाइपलाइन एक साथ होने से यह परेशानी आती है।
- आराधना, ब्रज विहार
इंदिरापुरम में जीडीए और नगर निगम ने कभी पेयजल पाइपलाइन को नहीं बदला। पूरा क्षेत्र या तो आरओ का इस्तेमाल करता है या फिर बोतलबंद पानी को खरीदकर पीना पड़ता है।
- ओमबीर यादव, इंदिरापुरम
पानी दूषित होने की समस्या क्षेत्र में लंबे समय से है। पेयजल और सीवर की लाइन एक साथ है। दोनों में लीकेज होने पर घरों में दूषित पानी पहुंचता है। बजाय पाइपलाइन बदलने के इसकी मरम्मत कर दी जाती है। इसके अलावा क्षेत्र में कई वर्षों से एक ही समय पानी की आपूर्ति हो रही है। 15 से 20 साल पुरानी पाइपलाइन है।
- अरुण तोमर, कड़कड़ माडल, साहिबाबाद
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