Chikheang Publish time 2026-1-7 22:56:54

नोवामुंडी में हाथी का तांडव: एक परिवार के चार समेत छह की मौत, दो बच्चों ने अंधेरे में रेंगकर पेड़ पर चढ़कर बचाई जान

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बाबाड़िया गांव के मुंडा साई टोला में बच्‍चे ने हाथी के हमले के बाद भागकर जान बचाई।


जागरण टीम, नोवामुंडी / चाईबासा । नोवामुंडी थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात जंगली हाथी के तांडव ने पूरे इलाके को दहशत में डुबो दिया। बाबाड़िया गांव के मुंडा साई टोला (उलीहातु) और समीपवर्ती बड़ापासेया गांव में हुए इस भयावह हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत कुल छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।    इस घटना ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है, जबकि दो नाबालिग बच्चों की साहसिक जीवटता ने अंधेरे में भी उम्मीद की एक किरण दिखाई।    बाबाड़िया गांव के सनातन मेराल (53), उनकी पत्नी जोलको कुई (51), पुत्र मंगडू मेराल (6) और पुत्री दमयंती मेराल (8) जंगली हाथी के हमले का शिकार हो गए। वहीं, बड़ापासेया गांव में गुरुचरण लागुरी (21) और मंगल बोबोंगा की भी हाथी के हमले में मौत हो गई।   सनातन मेराल के परिवार में केवल 14 वर्षीय जयपाल मेराल और 10 वर्षीय बहन सुशीला मेराल ही इस त्रासदी में जीवित बचे हैं। जयपाल ने कांपती आवाज में बताया कि रात करीब दस बजे एक दंतेल हाथी उनके कुंबा (घर) में घुस आया।    हाथी ने सूंड़ से माता-पिता और भाई-बहन को बाहर खींचकर जमीन पर पटक दिया। पलभर में खुशहाल घर मातम में बदल गया। इस दौरान हाथी ने सुशीला को भी पकड़ लिया, जिससे उसका दाहिना पैर टूट गया।    बावजूद इसके, घायल सुशीला ने अद्भुत साहस दिखाया। अंधेरे का फायदा उठाकर वह जमीन पर रेंगते हुए करीब 200 मीटर दूर गांव के भीड़भाड़ वाले इलाके तक पहुंची और मदद जुटाई।    वहीं जयपाल के साथ मौजूद वीरसिंह पुरती ने जान बचाने के लिए पास के पेड़ पर चढ़कर पूरी भयावह घटना अपनी आंखों से देखी। घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई।    आधी रात ग्रामीण टॉर्च और लालटेन लेकर घटनास्थल की ओर दौड़े। जंगल और कुंबा के बाहर पड़े शवों को देखकर हर कोई सन्न रह गया। घबराए ग्रामीणों ने घायल सुशीला को तुरंत नोवामुंडी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है।   बुधवार को सभी छह शवों को चाईबासा सदर अस्पताल लाया गया, जहां एक साथ पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ता त्रिशानु राय और प्रखंड अध्यक्ष दीकू सवैंया मृतकों के परिजनों के साथ मौजूद रहे।    उन्होंने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया समय पर पूरी कराने और शवों को परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाने में सहयोग किया। जगन्नाथपुर के विधायक और उप मुख्य सचेतक सोनाराम सिंकू के निर्देश पर प्रशासन ने मृत्युप्रमाण पत्र शीघ्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी की, ताकि पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सरकारी सहायता मिलने में कोई अड़चन न आए।   विधायक स्वयं भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। ग्रामीण मुंडा हरिश चंद्र लागुरी ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में यह पहली बार है जब हाथी गांव के भीतर घुसा है।    करीब 14 फीट ऊंचा हाथी मस्ती की हालत में सीधे बस्ती में प्रवेश कर गया और इतना बड़ा हादसा हो गया। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में डर का माहौल है। लोग रातें जागकर काट रहे हैं और जंगल की ओर जाने से कतरा रहे हैं।    यह घटना न केवल वन्यजीव और मानव संघर्ष की भयावह तस्वीर पेश करती है, बल्कि यह भी बताती है कि जयपाल और सुशीला जैसी मासूम जानों की हिम्मत किस तरह अंधेरे में भी जीवन की लौ जलाए रखती है।
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