cy520520 Publish time 2026-1-7 21:27:01

भारत में प्राकृतिक गैस खपत में गिरावट, 15% ऊर्जा लक्ष्य पर संकट; सरकार ने 2030 तक रखा इतना बड़ा टारगेट

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/07/article/image/Gas-1767802452265.jpg

भारत में गैस की खपत घटी: इकोनॉमी में हिस्सेदारी बढ़ाने का सरकारी लक्ष्य, दावा- पावर प्लांट्स पर पड़ रहा असर



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली| भारत में प्राकृतिक गैस की खपत में इस वर्ष में अब तक कमी दर्ज की गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 7% से बढ़ा कर 15% करने के लक्ष्य के अनुकूल नहीं है। क्रिसिल की तरफ से सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक भारत में प्राकृतिक गैस की औसत खपत करीब 190 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) रही है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 200 MMSCMD से 4.6% कम है।

हालांकि सरकार की एजेंसी पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में गैस की खपत में 8.6 फीसदी की गिरावट आई है। क्रिसिल रिपोर्ट हालांकि यह भी कहती है कि हो सकता है कि यह गिरावट स्थाई ना हो लेकिन यह साफ तौर पर बता रहा है कि देश में गैस की खपत बढ़ाने की योजना सही तरीके से आगे नहीं बढ़ पा रही है।

क्रिसिल की रिपोर्ट बताती है कि स्पॉट एलएनजी (LNG) कीमतों में उछाल एक बड़ा कारण है। चालू वित्त वर्ष के दौरान इसकी कीमत औसतन 13 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन मैट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट: गैस मापने का मापक) रही है, जो पिछले साल के मुकाबले 34 फीसदी ज्यादा है। इसका सबसे ज्यादा असर प्राकृतिक गैस आधारित बिजली संयंत्रों पर पड़ा है।

यह भी पढ़ें- ट्रंप टैरिफ भी नहीं रोक पाया भारत की रफ्तार, बढ़ गया GDP ग्राफ; 6.5% से बढ़कर 7.4% हुआ अनुमान
गैस न होने की वजह से नहीं चल पाते बिजली संयंत्र

देश में तकरीबन 25 हजार मेगावाट क्षमता की गैस आधारित बिजली संयंत्र तैयार होने के बावजूद गैस नहीं होने की वजह से नहीं चल पाते हैं। इनमें से कुछ संयंत्र जब विदेशों में गैस सस्ती होती है तो उसे खरीदते हैं और इन संयंत्रों को चलाते हैं। लेकिन जब कीमत 13 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो तो इसे आयात कर भारत लाना और इससे तैयार बिजली बनाना फायदेमंद नहीं होता। इतनी महंगी बिजली कोई नहीं खरीदता। ऐसे में ये संयंत्रों को चलाने वाली कंपनियां महंगी गैस नहीं खरीदती।
ऊर्जा खपत में गैसों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश

बहरहाल, यह पूरा परिदृश्य केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के विपरीत है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश की कुल ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा लगभग 6-7 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया जाए। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई वर्ष पहले घोषित किया गया था, ताकि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले और कार्बन उत्सर्जन कम हो।
समय से पहले मानसून, गर्मी में कूलिंग की जरूरत घटी

क्रिसिल रिपोर्ट के मुताबिक समय से पहले मानसून आने से गर्मी में कूलिंग की जरूरत घटी, जबकि पिछले साल पॉलिसी के तहत गैस आधारित प्लांट्स की डिस्पैच बढ़ाई गई थी। हालांकि, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) सेक्टर में मजबूती दिखी है। इस सेक्टर में गैस की खपत सालाना आधार पर 8.8 फीसद बढ़ कर 44 MMSCMD हो गई है। देश में जितनी गैस की खपत होती है उसका 23 फीसदी सीजीडी में ही हो रही है।

यह आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि दश में CNG स्टेशनों के साथ ही घरेलू पीएनजी कनेक्शनों (PNG) में भी तेजी से विस्तार हो रहा है। सनद रहे कि पूर्व में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अन्य रिपो‌र्ट्स भी संकेत देती हैं कि ऊंची एलएनजी कीमतें और घरेलू उत्पादन की सीमित वृद्धि की वजह से भारतीय इकोनमी में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना खासा चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
Pages: [1]
View full version: भारत में प्राकृतिक गैस खपत में गिरावट, 15% ऊर्जा लक्ष्य पर संकट; सरकार ने 2030 तक रखा इतना बड़ा टारगेट

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com