संभल पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का किया भंडाफोड़, 11 राज्यों तक फैला नेटवर्क; 5 आरोपी गिरफ्तार
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/07/article/image/C-343-1-BRL1048-465721-(1)-1767786058132-1767786067847.jpgसंवाद सहयोगी, बहजोई। साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। म्यूल अकाउंट के माध्यम से भोले-भाले लोगों से ठगी करने वाले गिरोह पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने न केवल आरोपितों को गिरफ्तार किया, बल्कि उनके जरिए कई राज्यों में फैले साइबर फ्राड के नेटवर्क को भी उजागर किया है। जिसमें पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
बहजोई मंडी समिति परिसर में रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में प्रेस वार्ता करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक अनुकृति शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत भारत सरकार के प्रतिबिंब पोर्टल से प्राप्त हुए डेटा के आधार पर जनपद संभल की साइबर पुलिस के द्वारा जांच की जा रही थी और उसमें ऐसे बैंक के म्यूल खाता तलाश किया जा रहे थे जिनके जरिए से साइबर ठगी होती है और उसी के आधार पर थाना बहजोई पर पंजीकृत बीएनएस और आइटी एक्ट की धारा के अंतर्गत पांच आरोपितों शाहरुख, सलमान, अमान, गुड्डू राघव और पवन निवासी गांव भवन, थाना बहजोई के विरुद्ध दर्ज हुई थी।
इन सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। आरोपितों से साइबर अपराध में प्रयुक्त चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने साइबर ठगी के लिए यूपी ग्रामीण बैंक, स्टेट बैंक आफ इंडिया, एक्सिस बैंक, बैंक आफ बड़ौदा और इंडियन बैंक में कुल 10 बैंक खाते खुलवाए थे।
खास बात यह है कि इन खातों को भारत सरकार के एनसीआरपी पोर्टल पर जांचने पर नोएडा सहित उत्तर प्रदेश और दिल्ली, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, असम और राजस्थान सहित कुल 11 राज्यों में 25 शिकायतें दर्ज पाई गईं।
इन मामलों में लगभग 12,22,500 रुपये की साइबर ठगी की पुष्टि हुई है। बैंक खातों के विश्लेषण में करीब 17 लाख रुपये का क्रेडिट और लगभग 16 लाख रुपये की निकासी सामने आई है, जबकि वर्तमान में भी इन खातों में 1,18,000 रुपये साइबर फ्रॉड से जुड़े पाए गए हैं, जिसकी जांच जारी है।
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपित अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों के मोबाइल फोन हैक करते थे और फिर उनके संपर्क में मौजूद लोगों से परिचित बनकर बीमार होने, एक्सीडेंट होने या विदेश में फंसने जैसी कहानियां गढ़कर रुपये की मांग करते थे। कुछ मामलों में पीड़ितों की फोटो को धोखे से लेकर उसे अश्लील बनाकर वायरल करने की धमकी भी दी गई।
Pages:
[1]