LHC0088 Publish time 2026-1-7 13:26:44

सुविधाओं से लैस रैन बसेरा पड़ा सूना, गरीबों को जानकारी न होने से स्टेशन पर कुत्तों के बीच गुजर रही रातें

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स्टेशन पर कुत्तों के बीच गुजर रही रातें



रूपेश कुमार, फारबिसगंज (अररिया)। कंपकंपाने वाली ठंड में होटल जैसी आश्रय स्थल (रैन बसेरा) में पर्याप्त सुविधा संसाधन के बावजूद जागरूकता के अभाव में जरूरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ठंड के मौसम में आश्रय की तलाश कर रहे जरूरतमंद इधर-उधर भटक कर रेलवे स्टेशन पर आवारा कुत्तों के बीच सोने को मजबूर हैं।

जहां सर्द सीजन में एक तरफ लोग अपने-अपने घरों में रजाई, गद्दों में दुबके हैं वहीं शहर में ऐसे गरीब बेसहारा भी हैं, जो सर्द रातों में नीचे फुटपाथ, स्टेशन पर चिथड़ों में लिपटकर रात काटने मजबूर है।

रैन बसेरा कहने को शहर के काली मेला रोड में होटल व्यवस्था की तरह खुले हैं। जहां तीन महिला केयर टेकर के साथ एक नाइट गार्ड भी हैं। लेकिन दुर्भाग्य जागरूकता के अभाव में उनमें रात गुजारने एक भी गरीब लोग नहीं आते हैं। इनकी क्षमता 50 बिस्तर की है, फिर भी यहां की बजाए लोग फुटपाथ पर सोने मजबूर है।
पड़ताल में जागरण टीम पहुंची तो रैन बसेरा के सारे बेड खाली दिखे

रविवार व सोमवार की सर्द रात में जागरण टीम जब रैन बसेरा की पड़ताल लेने पहुंची तो रैन बसेरा के इक्का दुक्का छोड़ सारे बेड खाली दिखे। जहां केयर टेकर के साथ नाइट गार्ड के रूप में मझुआ पंचायत के कन्हैया सिंह मौजूद पाये गये। जो महज कागजी कोरम पूरा कर रजिस्टर मेंटेन जैसा प्रतीत हुआ। जबकि सच्चाई कमरे में साफ झलक रहा था।

इसके उपरांत टीम रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो वहां गरीब बेसहारा अपने स्वजनों सहित नीचे फर्श पर सोते नजर आए। उनसे जब पूछा गया कि आप रैन बसेरा में क्यों नहीं जाते? क्या नगर परिषद के कर्मचारी रैन बसेरा नहीं पहुंचाते तो अधिकांश का कहना था कि उन्हें जानकारी ही नहीं कि नगर परिषद का रैन बसेरा कहां है।
रैन बसेरा की गरीबों को जानकारी ही नहीं

रैन बसेरा को लेकर गरीबों के बीच जानकारी ही नहीं जहां जागरूकता की जरूरत है। जबकि तीन केयर टेकर के साथ महज कागजी कोरम रैन बसेरा में पूरा किया जा रहा हैं। जहां नगर परिषद को संचालित रैन बसेरा के विषय में आसपास के क्षेत्र में सूचना पटल लगाने चाहिए।

इसके अलावा फुटपाथ में सोने वालों को वहां से रैन बसेरा का पता बताकर भेजना चाहिए, ऐसा नहीं किया जाता है। जिससे परेशान होकर गरीब बाहर सोने मजबुर होते हैं।
आश्रय स्थल में निःशुल्क रात्रि विश्राम की है व्यवस्था

जानकारी के अनुसार लाखों रुपये खर्च कर बने आश्रय स्थल में निःशुल्क रात्रि विश्राम के साथ शुद्ध पेयजल, स्नानागार,शौचालय के अलावे आगामी दिनों में हेल्प डेस्क के साथ स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्था की गयी है। जिसका भार प्रगति एलो को दिया गया है। वहीं तीन महिला केयर टेकर के साथ साथ एक नाइट गार्ड की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो देखभाल कर रही है।


जागरूकता के लिए विभिन्न विभाग को पत्र निर्गत कर निराश्रितों को आश्रय स्थल में भेजने का आग्रह किया गया है। माइकिंग के जरिए प्रचार प्रसार के साथ रेलवे स्टेशन व बस पड़ाव पर इसके लिए बैनर व पोस्टर लगाया जाएगा।- मनीष कुमार, नगर मिशन प्रबंधक
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