Chikheang Publish time Yesterday 11:26

गरीबों की योजनाओं पर नेताओं की नजर! तेजस्वी यादव के करीबी पूर्व विधायक के परिवार पर राशन और आवास योजना लेने का आरोप

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पूर्व विधायक के परिवार का घोटाला! - फोटो : social media



डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक पूर्व विधायक के परिवार पर गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेने का गंभीर आरोप लगा है। मामला अलौली विधानसभा क्षेत्र से राजद के पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा से जुड़ा है, जिनकी पत्नी के नाम राशन कार्ड और बेटे के नाम मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने का खुलासा हुआ है। इस प्रकरण ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा के परिवार के सदस्य आज भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले राशन का लाभ उठा रहे हैं। आरोप है कि विधायक बनने के बाद भी उनके परिवार का नाम राशन कार्ड से नहीं हटाया गया। जबकि नियमों के अनुसार जनप्रतिनिधि और उनके परिवार को गरीबों के लिए निर्धारित योजनाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

पूर्व विधायक की पत्नी सुशीला देवी के नाम जारी राशन कार्ड में संयुक्त परिवार के छह सदस्यों के नाम दर्ज हैं। इसी राशन कार्ड के आधार पर प्रति माह 12 किलो गेहूं और 18 किलो चावल, कुल 30 किलो अनाज का उठाव किया जा रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, अंतिम बार 5 दिसंबर 2025 को इस कार्ड के जरिए 6 किलो गेहूं और 24 किलो चावल का उठाव किया गया है। आरोप है कि यह उठाव विधायक रहने के दौरान भी लगातार होता रहा।

मामला यहीं नहीं रुका। जांच में यह भी सामने आया है कि पूर्व विधायक के बेटे रामानंद सदा को वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। योजना के तहत उन्हें तीन किस्तों में कुल 1.20 लाख रुपये की राशि दी गई, जो बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना का उद्देश्य भूमिहीन, बेघर और अत्यंत गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ऐसे में एक पूर्व विधायक के बेटे को इस योजना का लाभ मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।

राशन डीलर रामानंद राम ने भी पुष्टि की है कि सुशीला देवी के नाम जारी राशन कार्ड पर छह सदस्यों के लिए नियमित रूप से अनाज का वितरण किया गया है और हाल में भी इसी कार्ड के जरिए अनाज उठाया गया। वहीं, मार्केटिंग ऑफिसर अंजनी कुमार का कहना है कि यह मामला पुराना है और इसकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

हालांकि, इन आरोपों पर पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा ने खुद को बेखबर बताते हुए सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे को आवास योजना का लाभ मिलने की जानकारी नहीं है और इसकी पुष्टि संबंधित कार्यालय से की जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले राशन कार्ड में उनका और उनकी पत्नी का नाम दर्ज था, लेकिन बाद में नाम कटवा दिया गया है। पत्नी के नाम पर राशन उठाव के आरोपों को उन्होंने गलत बताया।

वहीं, पूर्व विधायक के बेटे रामानंद सदा ने इस मामले में अलग बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है और उसी राशि से उन्होंने घर का निर्माण भी कराया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता अलग रहते हैं, जबकि उनकी मां उनके साथ रहती हैं। राशन कार्ड से नाम हटवाने के लिए दो बार मार्केटिंग ऑफिसर कार्यालय में आवेदन देने का दावा भी उन्होंने किया है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न सिर्फ एक पूर्व विधायक के परिवार तक सीमित रहेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा गरमाया हुआ है और विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष भी इस पर नजर बनाए हुए है।

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