पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश की तरह यूपी में भी बिजली निजीकरण रद करने की मांग तेज, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति आंदोलन करेगा तेज
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/07/article/image/UPPCL-1767765332127.jpgतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पुडुचेरी में निजीकरण का टेंडर निरस्त होने और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा निजीकरण न करने की घोषणा के बाद बिजलीकर्मियों में उम्मीद की किरण जगी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मोहद्दीपुर स्थित हाइडिल कालोनी में उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है।
समिति के संयोजक पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश की तरह प्रदेश में भी पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त कर देनी चाहिए। पुडुचेरी में बिजली निगम के निजीकरण के लिए तकरीबन साढ़े तीन वर्ष पहले टेंडर जारी किया गया था।
निजीकरण की घोषणा होते ही पुडुचेरी के बिजलीकर्मियों ने विरोध शुरू कर दिया था। एक निजी कंपनी ने अगस्त, 2025 में पुडुचेरी में पंजीकरण कराया तो एक बार फिर निजीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। पांच जनवरी की शाम प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पुडुचेरी बिजली विभाग के निजीकरण का टेंडर निरस्त कर दिया गया है।
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पांच जनवरी को ही आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण न होने की बात कही। इस दौरान जीवेश नंदन, सीबी उपाध्याय, प्रभुनाथ प्रसाद, संगम लाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, करुणेश त्रिपाठी, ओम गुप्ता, राजकुमार सागर, विजय बहादुर सिंह, राकेश चौरसिया आदि मौजूद रहे।
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