आयुष विश्वविद्यालय शुरू होगा सिद्धा व सोवा रिग्पा चिकित्सा से उपचार, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विधाओं का मिल रहा लाभ
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/07/article/image/ayushuniv-1767763540792.jpgमहायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय। जागरण
संवादसूत्र, भटहट। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में जल्द ही दो दुर्लभ एवं प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों सिद्धा और सोवा रिग्पा से उपचार प्रारंभ किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. के रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि इसके लिए आवश्यक तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं, जिससे आमजन को उन्नत व वैकल्पिक उपचार का लाभ मिल सकेगा।
कुलपति ने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय के बाह्य रोगी सेवा (ओपीडी) में आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी पद्धति से उपचार किया जा रहा है। प्रतिदिन रोगियों की संख्या 1200 से अधिक पहुंच गई है। अब सिद्धा और सोवा रिग्पा चिकित्सा के जुड़ने से ओपीडी और अधिक समृद्ध होगा। इस दिशा में विश्वविद्यालय ने वाराणसी के सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान से समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।
सोवा रिग्पा एक प्राचीन तिब्बती चिकित्सा पद्धति है, जिसमें प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और खनिजों के माध्यम से उपचार किया जाता है। यह पद्धति कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, संधिवात सहित कई जटिल रोगों में प्रभावी मानी जाती है। सातवीं–आठवीं शताब्दी में विकसित यह चिकित्सा पद्धति आज भारत सहित अनेक देशों में प्रचलित है।
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वहीं, तमिल संस्कृति से उत्पन्न सिद्धा चिकित्सा पद्धति शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। यह त्रिदोष सिद्धांत, योग, प्राणायाम, प्राकृतिक औषधियों एवं अनुशासित जीवनशैली पर बल देती है। सिद्धा चिकित्सा को तमिलनाडु सरकार की ओर से भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कुलपति ने कहा कि दोनों चिकित्सा पद्धतियों के शुरू होने से क्षेत्रवासियों को लाभ मिलेगा। आयुष विश्वविद्यालय समग्र एवं पारंपरिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। इससे रोगियों की संख्या भी बढ़ेगी। अन्य जगहों पर उपचार के लिए जाने वाले रोगी यहां बेहतर सुविधा पा सकेंगे।
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