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नई व्यस्था: नीट, जेईई और सीयूईटी की नहीं होगी जरूरत, अब सैट से मिलेगा कॉलेज

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सांकेतिक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, आगरा। केंद्र सरकार ने मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में प्रवेश के लिए सीयूईटी में बदलाव की तैयारी में है। नीट, जेईई और सीयूईटी परीक्षाओं को समाप्त हो सकती है। इससे सरकार छात्रों को कोचिंग संस्थानों निभरता को कम करने का प्रयास कर रही है। इसके स्थान पर छात्र कक्षा 11 में दो बार अप्रैल और नवंबर में स्कोलास्टिक असेसमेंट टेस्ट (सैट) देंगे।

दोनों परीक्षा के परिणाम में जिसमें बेहतर अंक होंगे उसे कक्षा 12 के बोर्ड प्रतिशत के साथ जोड़कर परसेंटाइल निकाली जाएगी। इसी आधार पर कॉलेज अलाटमेंट होगा। इस योजना से छात्रों का तनाव कम होगा और स्कूल शिक्षा पर फोकस बढ़ेगा। इस योजना को 2027 से लागू किया जा सकता है।
11वीं में सैट और 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणाम को मिलाकर बनेगा परसेंटाइल



यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइ्रपी) 2020 के अनुरूप है। जून 2025 में गठित एक 11 सदस्यीय केंद्रीय समिति जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी कर रहे हैं ने इस पर विचार किया। समिति में सीबीएसई, एनसीईआरटी, आइआइटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, एनआईटी त्रिची, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति का उद्देश्य कोचिंग कल्चर पर निर्भरता कम करने के साथ छात्रों के तनाव को कम करना और परीक्षाओं को स्कूल पाठ्यक्रम से जोड़ना है। इसकी रिपोर्ट कमेटी जल्द सौंपेगी।
बिन नीट के डॉक्टर और बिन जेईई के इंजीनियर बनना होगा संभव, स्कूल शिक्षा पर बढ़ेगा फोकस

2027 से इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। समिति ने सुझाव दिया है परीक्षाएं अप्रैल और नवंबर में दो बार होंगी, जिससे छात्रों को बेहतर प्रदर्शन का मौका मिलेगा। साथ ही, कोचिंग सेंटरों पर दैनिक दो से तीन घंटे की सीमा लगाई जाएगी, और उम्र सीमा (16 वर्ष से कम पर प्रतिबंध रहेगा) लागू होगी।
स्कूल में हो सकेगी तैयारी

इस योजना से छात्रों को कई लाभ होंगे। सबसे बड़ा फायदा कोचिंग पर निर्भरता कम होना है। वर्तमान में लाखों छात्र कोटा जैसे शहरों में जाकर वर्षों बिताते हैं, जिससे मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या के मामले बढ़ते हैं। नई व्यवस्था में कक्षा 11 से ही परीक्षा होने से दबाव दो वर्षों में वितरित होगा। छात्र स्कूल में ही तैयारी कर सकेंगे, क्योंकि पाठ्यक्रम एनसीईआरटी और सीबीएसई या राज्य बोर्ड से जुड़ेगा। साथ ही, रट्टा मारने की बजाय समझ पर जोर होगा। जिससे छात्रों की रचनात्मकता और जिज्ञासा बढ़ेगी। ग्रामीण और गरीब छात्रों को लाभ होगा।
लाखों की रुपये की होगी बचत

अभिभावकों के लिए भी यह नीति वरदान साबित होगी। कोचिंग फीस पर लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वर्तमान में एक छात्र की तैयारी पर औसतन पांच से 10 लाख रुपये लगते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए बोझ है। नई व्यवस्था से बच्चे घर पर रहकर पढ़ सकेंगे। जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर दवाब नहीं होगा।




यह योजना सराहनीय है। छात्रों को दो बार परीक्षा देने से दबाव कम होगा और स्कूल शिक्षा मजबूत होगी। लेकिन सिलेबस एलाइनमेंट सही हो, वरना व्यवस्था बदलते वक्त मुश्किलें आएंगी। कोचिंग उद्योग को निर्भरता कम करने से छात्रों पर मानसिक दबाव कम होगा। - डॉ. ललितेश यादव, शिक्षक

अभिभावकों के लिए राहत की बात है कि बच्चे तैयारी के लिए बाहर नहीं जाएंगे। कक्षा 11 से परीक्षा से तैयारी जल्दी शुरू होगी, जो ग्रामीण छात्रों को बराबरी का मौका देगी। बेहतर परिणाम के लिए शिक्षक अभी से तैयारी शुरू कर दें। - डॉ. संजय बंसल, शिक्षक

यह विचार सफल होगा क्योंकि यह रट्टा सिस्टम को खत्म करेगा। परसेंटाइल आधारित अलाटमेंट निष्पक्ष होगा। छात्रों को क्रिएटिविटी के लिए समय मिलेगा, लेकिन राज्य बोर्डों की समानता तय होना जरूरी है। - सत्यम पटेल, शिक्षक

कोचिंग पर सीमा से शिक्षण गुणवत्ता बढ़ेगी। अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम होगा और छात्रों की मेंटल हेल्थ सुधरेगी। 2027 से लागू होना संभावित है, लागू होने पर यह नीति बड़ा बदलाव लाएगी। अभी से पायलट प्रोजेक्ट से शुरू करना होगा। - अमृता, शिक्षक
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