cy520520 Publish time 2026-1-7 06:26:17

धमाका सुन नींद से जागे पड़ोसी पर बचा नहीं पाए जान, आग में जलकर खत्म हुआ DMRC इंजीनियर का पूरा परिवार

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मुकुंदपुर स्थित डीएमआरसी स्टाफ क्वाटर के फ्लैट में लगी आग और चश्मदीद ट्रक चालक सुखवीर सिंह यादव।   



शमसे आलम, बाहरी दिल्ली। मुकुंदपुर स्थित डीएमआरसी के फ्लैट में हीटर में इतना तेज धमाका हुआ कि अधिकतर पड़ोसी नींद से जग गए। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज एक ट्रक चालक ने 200 मीटर दूर से सुनी। सोसायटी के लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। बाहर निकलकर देखा तो पांचवी मंजिल के बालकनी से आग की लपटें बाहर आ रही थीं।

भागकर फ्लैट के पास पहुंचे, तो गेट अंदर से बंद था। काफी पीटने के बाद भी अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। लोहे का मजबूत दरवाजा भी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन नहीं टूट पाया। फिर बिना समय गंवाए साथ वाली टावर पर पड़ोसी चढ़ गए। जहां से सोसायटी के इन-हाउस फायर-फाइटिंग सिस्टम की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश करने लगे। आग पाने में इन्हें कामयाबी तो मिली, लेकिन किसी का जान नहीं बचा पाएं।

फ्लैट से 200 मीटर दूर डीएमआरसी का वर्कशाप है। जहां ट्रक चालक सुखवीर सिंह यादव सोमवार की शाम ट्रक से रोड़ी लेकर आए थे। ट्रक खाली नहीं होने के कारण वर्कशाप के पास से ही ट्रक लगाकर सो गए।

यादव ने कहा कि देर रात करीब 2:15 बजे धमाके की तेज आवाज सुनाई दी। जिससे उनकी आंखे खुल गई। ट्रक के अंदर से देखा कि सामने एक फ्लैट से आग की लपटें निकल रही हैं। उन्हें लगा कि कोई सिलेंडर फटा है। तुरंत वर्कशाप के आसपास तैनात सुरक्षाकर्मी को इसकी जानकारी दी।
रविवार को ही भैया व उनके परिवार से हुई थी मुलाकात

बहन ऊषा देवी ने बताया कि बीते रविवार को वह उनका परिवार अजय के घर मिलने आए थे। कई घंटे उनके परिवार के साथ रूकीं। सभी काफी खुश थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था। इससे पहले नववर्ष पर फोन पर सभी से बात हुई थी। वहीं, परिवार के तीनों शव पूरी तरह से जल चुके थे।

बच्ची के शव की पहचान कर ली गई, लेकिन पति और पत्नी के शव की पहचान करना काफी मुश्किल था। नीलम के शरीर से चिपके कपड़े से उनकी पहचान हो सकी। शव शिनाख्त के समय पीड़ित परिवार फूट-फूटकर रोने लगा। सभी एक दूसरे को सांत्वना दे रहे थे।
पर्यावरण प्रेमी थे विमल

पड़ोसियों ने बताया कि अजय विमल पर्यावरण प्रेमी थे। सोसायटी के अंदर समय-समय पर पौधे लगाते रहते हैं। अपने फ्लोर पर कई तरह के पौधे लगाया हुआ था। दूसरों से भी पौधे लगाने और हरियाली बचाने का संदेश देते रहते थे। सोसायटी के अंदर कोई भी कार्यक्रम होता बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।

पड़ोसियो ने बताया कि अजय काफी नेकदिल व मिलनसार थे। सभी से हंसकर बात करते थे। हर रविवार सभी से मिलते थे। सोसायटी को सुंदर बनाने में इनका भी योगदान रहा है।

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