LHC0088 Publish time 2026-1-7 04:56:07

कौन सा पानी पी रहे हैं आप: नल का गंदा पानी या खनिज रहित आरओ? दिल्ली के कई इलाकों में TDS की मात्रा 900 के पार

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नबी करीम के किला कदम शरीफ क्षेत्र में आपूर्ति का दूषित पानी दिखाती महिलाएं। जागरण



नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। जहरीले पेयजल की आपूर्ति केवल मध्य प्रदेश के इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों तक को स्वच्छ व स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद पेयजल की आपूर्ति मयस्सर नहीं है।

स्थिति यह कि दिल्ली के कई क्षेत्रों पेयजल में टोटल डिजाॅल्व साॅलिड्स (टीडीएस) की मात्रा खतरनाक स्तर 968 तक है, जिसे पीने पर लोगों को पेट, किडनी और बालों से संबंधित बीमारियां हो रही हैं।
लोगों की पूरी निर्भरता टैंकर या बोतलबंद पानी पर

पानी की गुणवत्ता की इस स्थिति को देखते हुए राजधानी वासियों की रिवर्स ऑस्मोसिस (आरो) मशीन तथा बोतलबंद पानी पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। जिसके चलते गली-गली में उसका कारोबार काफी फलफूल रहा है।

इसी तरह, स्वाधीनता के इतने वर्षों बाद भी दिल्ली के कई इलाकों में अभी तक दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) का पेयजल नहीं पहुंचा है। कई इलाकों, गलियों में पाइपें बिछी है, लेकिन नियमित पानी नहीं आता है। ऐसे में वहां के लोगों की पूरी निर्भरता टैंकर या बोरवेल के साथ बोतलबंद पानी पर अभी भी है।
टीडीएस भी मानक से अधिक 561 रहा

हर बूंद हो स्वच्छ-हर घूंट हो स्वच्छ अभियान के तहत जागरण के रिपोर्टरों ने करीब 50 स्थानों पर पानी की जांच की, जिसमें से कुछ स्थानों पर पानी खतरनाक स्तर पर मिले। इसमें रोहिणी जैसी बड़ी काॅलोनियां भी अछूती नहीं है।

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बाहरी दिल्ली के भलस्वा डेरी के यादव चौक पर पानी का टीडीएस 968 और रोहिणी सेक्टर-13 में 580 से लेकर 891 मिला। इसी तरह, जांच में दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी में टीडीएस भी मानक से अधिक 561 रहा।
पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त

जांच में मिला कि बाहरी दिल्ली के जिन रिहायशी क्षेत्रों में डीजेबी की जलापूर्ति की लाइन लीकेज की समस्या ज्यादा है, उन इलाकों में टीडीएस तय मानकों से अधिक पाया गया। उसमें 25 लाख से अधिक आबादी वाले भलस्वा डेरी, किराड़ी, बवाना, नरेला जैसे क्षेत्र की काॅलोनियों में टीडीएस 200 से लेकर 900 तक पाया गया।

गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने जल के पानी का इस्तेमाल छोड़ दिया है, इनके घरों में टैंकर से पानी पहुंच रहा है। जहां पानी गंदा है, वहां के निवासियों के अनुसार, पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त है और उसमें सीवर की लाइनें मिल रही है।
लोगों को पेट दर्द व उल्टी की समस्या

पूर्वी दिल्ली के मौजपुर गांव में पानी का टीडीएस 965 मापा गया। यहां अधिकतर लोगों ने बोरवेल किए हुए हैं। जल बोर्ड का पानी कई बार बदबूदार आने के साथ ही दूषित आता है।

ऐसे में यहां के लोग बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करते हैं। इस पानी में कई तरह के रसायन मिले हुए हैं। इस पानी को पीकर लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। संक्रमण होने पर लोगों के पेट में दर्द व उल्टियां होने लगती है।
दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत

बाहरी दिल्ली के किराड़ी, नरेला, भलस्वा डेरी क्षेत्र के बड़े हिस्से में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। क्षेत्र के निवासी जल बोर्ड के टैंकर पर आश्रित हैं।

नरेला की संजय काॅलोनी आरडब्ल्यूए सचिव ने बताया कि पांच-छह दिन में एक बार पानी की आपूर्ति की जा रही है। लोग पानी खरीदकर पी रहे हैं, या भूमिगत जल से काम चला रहे हैं। नांगलोई, सुल्तानपुरी, किराड़ी में लोगों को नल से काला-पीला रंग दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत है।
आज तक जल बोर्ड की पाइपलाइन नहीं पहुंची

दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में आज तक जल बोर्ड की पाइपलाइन तक नहीं पहुंची है।शाहीनबाग, देवली के साथ ही संगम विहार के कुछ इलाके, जैतपुर, मदनपुर खादर और खड्डा काॅलोनी के लोग या तो पीने के लिए पानी खरीदकर पीते हैं या टैंकर के भरोसे हैं। जिन इलाकों में पाइपलाइन से पेयजल की आपूर्ति हो भी रही है, वह कितना ठीक है, लोगों को पता ही नहीं।

कालकाजी में मंगलवार को जब \“दैनिक जागरण\“ की टीम ने टोटल डिजाॅल्व साॅलिड्स (टीडीएस) मापा तो वह 561 पाया गया, जो मानक से अधिक है। लोगों के मुताबिक देखने में पानी साफ लगता है, इसलिए कई बार पीने में भी इस्तेमाल हो जाता है।

महरौली वार्ड संख्या दो स्थित सोहनी अपार्टमेंट में जल बोर्ड की लाइन है। सुबह-शाम पानी आता है, पर गलियों में कई जगह सीवर ओवरफ्लो या नाली जाम होने की स्थिति में कब गंदा पानी आ जाए कहा नहीं जा सकता।
मजबूरी में पी रहे आरओ का पानी, वह भी खतरनाक

दिल्ली जल बोर्ड का पानी अक्सर दूषित आता है। इसके चलते लोगों को मजबूरी में आरओ अथवा कैंपर या जार से पानी मंगवाकर पीना पड़ता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस आरओ के पानी को लोग शुद्व समझकर पी रहे हैं, वह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। दैनिक जागरण की टीम ने पानी की टीडीएस जांच के दौरान जब कुछ स्थानों पर लोगों के आरओ के पानी के सैंपल लिए तो उस पानी का टीडीएस 60-70 तक मिला।

डाॅक्टरों की मानें तो सौ से कम टीडीएस होने का मतलब है कि पानी के सभी जरूरी मिनरल नष्ट हो चुके हैं। ऐसे में 100 से कम टीडीएस का जो पानी लोग पी रहे हैं, वह भी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। आईपी एक्सटेंशन में रहने वाली श्रुति के आरओ के पानी की जब जांच की गई तो उनका टीडीएस महज 57 था। उन्हें पता ही नहीं था कि कम टीडीएस भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
कभी भी आता है गंदा पानी, आरओ का पानी खरीदने को मजबूर लोग

आईपी एक्सटेंशन की ज्यादातर सोसायटियां पाॅश हैं। यहां जल बोर्ड का पानी तो आता है लेकिन उसके बावजूद लोग आरओ लगवाने या आरओ का पानी खरीदने को मजबूर हैं। समाजसेवी और स्थानीय निवासी सुरेश बिंदल ने बताया कि बिना आरओ के यहां पानी पी ही नहीं सकते। एक भी घर ऐसा नहीं होगा जहां आरओ न लगा हो।

इसके पीछे कारण है कि कभी भी गंदे पानी की आपूर्ति होने लगती है। यहां अभी तो टीडीएस ठीक है लेकिन कई बार गंदा और बदबूदार पानी आता है जिससे साेसायटी की टंकियों में कीड़े तक पड़ जाते हैं। इसके बाद टंकियों को साफ करवाना पड़ता है। वहीं, नीति अपार्टमेंट निवासी योगेंद्र बंसल ने बताया कि अक्सर सप्लाई के पानी के साथ सीवर का पानी मिलकर आता है।

इससे बीमारियों का खतरा रहता है। जब से इंदौर वाली घटना हुई है, तब से साफ पानी मिल रहा है। यह कितने दिन मिलेगा बस यही देखना है। सोसायटियों से सटे मंडावली के कई इलाकों में डीजेबी की पानी आपूर्ति ठप है तो लोग बोरवेल का इस्तेमाल करते हैं। जिसका टीडीएस 650 से अधिक है।
अक्सर होती है सीवरयुक्त पानी की सप्लाई

पूर्वी दिल्ली के शकरपुर, लक्ष्मी नगर, मंडावली समेत पुरानी दिल्ली के सीताराम बाजार इलाके में अक्सर सीवरयुक्त और बदबूदार पानी की सप्लाई होती है। शकरपुर यू ब्लाॅक निवासी अनीता ने बताया कि पिछले दिनों बदबूदार पानी की सप्लाई हुई। इससे काॅलोनी के सभी लोगों की टंकियों में बदबू फैल गई।

ऐसे में सप्लाई के पानी का उपयोग सिर्फ नहाने या धोने के कामों में करते हैं। पीने या खाना बनाने के लिए पानी के जार मंगवाते हैं। इससे घर के बजट पर भी असर पड़ता है। उधर, शकरपुर में ही एक स्थान पर टीडीएस 240 पाया गया। निवासी उषा शर्मा ने बताया कि अक्सर घर में दूषित पानी की सप्लाई होती है।
स्थान व टीडीएस



   दक्षिणी दिल्ली


    स्थान
   टीडीएस


   कालकाजी
    561


   महरौली
    428


   अमृतपुरी
    239


   ओखला फेज तीन
    186


   सरिता विहार
    136






   पूर्वी दिल्ली


   गुरु रामदास नगर
   121
   


   मंडावली
   156
   


   नीति अपार्टमेंट आईपी एक्स
   129
   


   कमैली कुंज आईपी एक्स
   125
   


   यू ब्लाॅक शकरपुर
   135
   


   ए ब्लाॅक शकरपुर
   139
   


   लक्ष्मी नगर
   140
   


   गुरु अंगद नगर
   139
   


   शकरपुर डब्ल्यू ब्लॉक
   240
   


   श्रीराम काॅलोनी
   109
   


   ब्रजपुरी
   131
   


   ब्रह्मपुरी
   145
   


   सीलमपुर
   137
   


   वेलकम
   124
   


   बाहरी दिल्ली


   रोहिणी सेक्टर-20, सी-1
    156 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   551 (भूमिगत जल)


   भलस्वा डेरी, यादव चौक
    968
   


   नीलकंठ अपार्टमेंट, रोहिणी सेक्टर-13
    168 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   


   गौरी शंकर एन्क्लेव, डी-ब्लाॅक, किराड़ी
    198 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   284 (भूमिगत जल)


   किराड़ी गांव
   
   182 (भूमिगत जल)


   नांगलोई, कैंप नंबर 3, एल-ब्लाक
   188 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   


   सुल्तानपुरी, एफ-ब्लाॅक,
   168 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   


   किराड़ी, अगर नगर, सी-ब्लाॅक, 4 नंबर गली
   211 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   


   शीश महल इन्क्लेव, किराड़ी
   304 (जल बोर्ड आपूर्ति)
   161 (भूमिगत जल)


   मध्य दिल्ली-नई दिल्ली


   आर्य समाज रोड, सीताराम बाजार
   281


   शाहगंज, अजमेरी गेट
   166


   रतन मार्केट, पहाड़गंज
   197


   विक्रम नगर
   218


   उर्दू बाजार, जामा मस्जिद
   180


   चावड़ी बाजार
   177


   नबी करीम
   510


   पश्चिमी दिल्ली


   अक्षरधाम अपार्टमेंट, द्वारका सेक्टर 19
   269


   राजनगर, पालम
   152


   रुद्र अपार्टमेंट द्वारका पाकेट- दो, सेक्टर-छह
   174


   सिद्धार्थ कुंज अपार्टमेंट, प्लाट 17, द्वारका सेक्टर-सात
   284




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दक्षिणी दिल्ली चुनिंंदा क्षेत्रों में कालकाजी जी गिना जाता है। सीवर की समस्या के चलते अक्सर लोग गंदे पानी को पीकर बीमार पड़ जाते हैं। कब गंदा पानी मिले कब साफ, इससे छुटकारा पाने के लिए वाटर प्यूरीफायर लगवाना पड़ा। सुबह सप्लाई वाले पानी का टीडीएस जांचा गया तो यह 500 के पार ही आया।






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-हितेश कौशिक, कालकाजी


सुबह-शाम जल बोर्ड के पानी की सप्लाई है। कई बार यहां गंदा पानी आने लगता है। इसलिए खरीदकर ही पानी पीते हैं। बाकी कामों के लिए भूजल का उपयोग होता है। जांच में इसका टीडीएस 428 आया है।






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-शैलेंद्र कुमार, महरौली


अक्सर पानी गंदा आता है। जिस पानी की आपूर्ति नियमित रूप से हो रही है। वह भी मानक के अनुरूप नहीं है। शुरू में गंदा पानी आता है। फिर धीरे-धीरे साफ होता है। ऐसे में जिनके पास सुविधा है उन्होंने आरओ लगवा रखा है। या बोतलबंद पानी मंगवाते हैं। अन्यथा वही पानी पीने को मजबूर हैं, जिसके चलते तमाम बीमारियां भी होती है। बच्चों में पीलिया, टाइफाइड की समस्या रहती है।






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-मनीष, आर्य समाज रोड, सीताराम बाजार
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